APAAR ID सच में ऐच्छिक है या मजबूरी? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर अप्लाई करने तक, पूरी गाइड
अगर आपका बच्चा स्कूल या कॉलेज में पढ़ रहा है, तो बीते कुछ महीनों में आपने APAAR ID यानी 'One Nation, One Student ID' का ज़िक्र कई बार सुना होगा। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत हर छात्र का एक यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी कार्ड बनाया जा रहा है। लेकिन अब यह मामला सिर्फ स्कूल की औपचारिकता नहीं रहा — यह देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है, और वहां जो सवाल उठे हैं वे सीधे इस बात से जुड़े हैं कि क्या आपके बच्चे की APAAR ID बनवाना वाकई "ऐच्छिक" (Voluntary) है या अब यह चुपचाप अनिवार्यता में बदल चुकी है।
इस लेख में हम सिर्फ यह नहीं बताएंगे कि APAAR ID क्या है और इसे कैसे बनवाया जाए, बल्कि यह भी साफ करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट में असल में हुआ क्या, और क्यों यह सवाल अभी भी अनसुलझा है कि यह योजना सच में स्वैच्छिक रह गई है या नहीं।
APAAR ID आख़िर है क्या?
APAAR यानी Automated Permanent Academic Account Registry, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत शुरू की गई एक पहल है। इसे "One Nation, One Student ID" इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह हर छात्र को एक 12 अंकों का यूनिक डिजिटल कोड देती है, जो उसकी प्री-प्राइमरी शिक्षा से लेकर कॉलेज तक की पूरी शैक्षणिक यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड अपने साथ रखता है।
सरकार का कहना है कि इसका मकसद देश की शिक्षा व्यवस्था को ज़्यादा डिजिटल, आसान और लचीला बनाना है, ताकि स्कूल या कॉलेज बदलने पर छात्रों को बार-बार कागज़ी दस्तावेज़ जमा न करने पड़ें।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ — पूरी टाइमलाइन
APAAR ID को लेकर कानूनी लड़ाई एक नहीं, बल्कि दो अदालतों से जुड़ी है, और दोनों को साथ समझना ज़रूरी है।
पहला मोड़: ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला (दिसंबर 2025)
मामले की शुरुआत ओडिशा से हुई, जहां एक अभिभावक ने अदालत का रुख किया क्योंकि उनके नाबालिग बच्चे के स्कूल ने APAAR ID बनाने के लिए आधार से जुड़ी सहमति मांगी थी। रोहित आनंद दास व अन्य बनाम ओडिशा राज्य व अन्य मामले में ओडिशा हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि APAAR ID के मॉडल सहमति फॉर्म में अभिभावकों को स्पष्ट रूप से सहमति देने से इनकार करने और योजना से बाहर निकलने (opt-out) का विकल्प दिया जाए, क्योंकि मौजूदा फॉर्म में यह सुविधा नहीं थी।
दूसरा मोड़: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई (20 जुलाई 2026)
यह मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा — इस बार अभिषेक बक्सी बनाम भारत संघ याचिका के ज़रिए, जिसे चार छात्रों के अभिभावकों ने दाखिल किया था और जिसमें APAAR ID योजना की संवैधानिक वैधता को ही चुनौती दी गई थी। 20 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।
पीठ ने कहा कि वह CBSE को याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच करने और ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देशों का पूरे देश में पालन सुनिश्चित करने का आदेश जारी करेगी। कोर्ट ने कहा कि विस्तृत लिखित आदेश बाद में अपलोड किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी में उस पूर्ण लिखित आदेश की पुष्टि नहीं है, इसलिए पाठकों को नवीनतम स्थिति जानने के लिए आधिकारिक CBSE नोटिफिकेशन या कोर्ट रिपोर्टिंग ज़रूर देखनी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क — प्राइवेसी और 'राइट टू बी फॉरगॉटेन'
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अदालत में कई अहम दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सहमति फॉर्म एक तरह के 'फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट' की तरह हैं, जिनमें न तो सूचित सहमति (informed consent) देने का वास्तविक विकल्प है, न ही उसे बाद में वापस लेने का।
जयसिंह का यह भी कहना था कि भले ही APAAR को "ऐच्छिक" बताया जाता है, लेकिन व्यवहार में यह लगभग अनिवार्य बन चुकी है, क्योंकि कक्षा 11 और 12 के CBSE रिकॉर्ड में शामिल होने के लिए आधार-लिंक्ड APAAR ID अनिवार्य कर दी गई है। उन्होंने आगे कहा — भले ही यह एक फायदेमंद योजना हो, लेकिन इसके लिए आधार और APAAR दोनों का होना ज़रूरी बना दिया गया है, जो सीधे प्राइवेसी के अधिकार और 'राइट टू बी फॉरगॉटेन' को प्रभावित करता है।
इसके अलावा जयसिंह ने तर्क दिया कि यह सहमति प्रक्रिया डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act), 2023 की धारा 6 के मानकों को भी पूरा नहीं करती। आसान भाषा में समझें तो DPDP Act की धारा 6 यह कहती है कि किसी भी व्यक्ति का डेटा इस्तेमाल करने के लिए ली गई सहमति "सूचित" (यानी व्यक्ति को पूरी जानकारी होनी चाहिए कि उसका डेटा कहां, कैसे और क्यों इस्तेमाल होगा) और "वापस ली जा सकने योग्य" (यानी बाद में मन बदलने पर सहमति रद्द करने का अधिकार) होनी चाहिए। जयसिंह के मुताबिक मौजूदा APAAR फॉर्म इन दोनों शर्तों को पूरा नहीं करता।
कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि CBSE के सर्कुलर हमेशा मौजूदा कानून के अधीन ही रहेंगे — यानी वे DPDP Act के दायरे से बाहर नहीं हो सकते, और योजना को कानून के मुताबिक ही लागू करना होगा।
असली सवाल — क्या APAAR ID अब भी सचमुच ऐच्छिक है?
यहीं पर यह मामला सिर्फ कानूनी बहस से आगे बढ़कर हर अभिभावक के लिए व्यावहारिक सवाल बन जाता है। सरकार लगातार कहती रही है कि APAAR ID बनवाना स्वैच्छिक है, कोई इसके लिए बाध्य नहीं है। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ अलग तस्वीर दिखाती है।
CBSE ने खुद घोषणा की है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के LOC (List of Candidates) यानी परीक्षा पंजीकरण के लिए APAAR ID अनिवार्य होगी। बोर्ड ने यह फैसला तब लिया जब उसे पता चला कि 2025-26 तक CBSE से संबद्ध स्कूलों के आधे से भी कम छात्रों के पास APAAR ID थी। इससे पहले अगस्त 2025 में भी CBSE ने कक्षा 10 और 12 के परीक्षा फॉर्म भरने के लिए APAAR ID को अनिवार्य शर्त बना दिया था — यानी जिन छात्रों की APAAR ID नहीं बनी होगी, स्कूल उनका बोर्ड परीक्षा पंजीकरण ही नहीं कर पाएंगे।
यह ठीक वही अंतर्विरोध है जिसे याचिकाकर्ताओं ने अदालत में उठाया — एक तरफ योजना को "स्वैच्छिक" बताया जाता है, दूसरी तरफ इसे परीक्षा पंजीकरण जैसी अनिवार्य प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है, जिससे व्यवहार में छात्रों के पास कोई असली विकल्प नहीं बचता।
इसके अलावा, CBSE के अपने आंकड़े राज्यों के बीच भारी असमानता भी दिखाते हैं — पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कक्षा 9 में सिर्फ करीब 9% और कक्षा 11 में लगभग 18% छात्रों के पास ही APAAR ID थी, जबकि हरियाणा जैसे राज्यों में यह आंकड़ा 50% से ऊपर था। इससे साफ है कि योजना का ज़मीनी क्रियान्वयन देशभर में बेहद असमान रहा है, और यही असमानता आगे चलकर भ्रम और दबाव दोनों बढ़ा सकती है।
APAAR ID के मुख्य फायदे
कानूनी विवाद के बावजूद, APAAR ID के पीछे का मूल मकसद व्यावहारिक है। यह छात्रों को अपनी मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट्स का भौतिक रिकॉर्ड संभालने की झंझट से मुक्ति दिलाता है और एक सुरक्षित डिजिटल लॉकर की तरह काम करता है, जहां स्कॉलरशिप, अवॉर्ड्स और क्रेडिट्स का डेटा सुरक्षित रहता है। एक स्कूल या कॉलेज से दूसरे में दाखिला लेते समय कागज़ी कार्रवाई भी काफी आसान हो जाती है।
APAAR ID कैसे बनवाएं?
APAAR ID बनवाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल रखी गई है:
- छात्र को अपने स्कूल जाकर डेमोग्राफिक जानकारी वेरीफाई करानी होती है।
- अगर छात्र नाबालिग है, तो माता-पिता की सहमति (Parental Consent) अनिवार्य शर्त है।
- वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद APAAR ID जनरेट हो जाती है।
- इसे छात्र के DigiLocker अकाउंट से लिंक कर दिया जाता है, जहां आगे सभी दस्तावेज़ जमा होते रहते हैं।
डेटा सुरक्षा को लेकर क्या नियम हैं?
सरकार के मुताबिक APAAR ID में छात्रों का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है, और यह जानकारी केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों या संस्थानों के साथ ही साझा की जाती है। दस्तावेज़ शेयर करने के लिए छात्र या उनके अभिभावकों की सहमति अनिवार्य बताई गई है। लेकिन जैसा कि ऊपर बताया गया, अदालत में यही सवाल उठा है कि क्या यह सहमति व्यवहार में वाकई "सूचित" और स्वतंत्र होती है, या सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई है।
अभिभावकों और छात्रों को अभी क्या करना चाहिए?
- अगर स्कूल APAAR ID के लिए सहमति फॉर्म भेजता है, तो उसमें "इनकार" या "opt-out" का विकल्प है या नहीं, ज़रूर जांचें।
- सहमति देने से पहले यह समझ लें कि आपका डेटा कहां और किन एजेंसियों के साथ साझा होगा।
- अगर आपके बच्चे का स्कूल CBSE से संबद्ध है और वह अगले सत्र में बोर्ड परीक्षा देने वाला/वाली है, तो ध्यान रखें कि LOC पंजीकरण के लिए APAAR ID अनिवार्य कर दी गई है — इसलिए भले ही योजना "ऐच्छिक" कही जाए, समय रहते इसकी प्रक्रिया पूरी कर लेना व्यावहारिक रूप से ज़रूरी हो सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट के अंतिम लिखित आदेश और CBSE के संशोधित सहमति फॉर्म के जारी होने का इंतज़ार करें — इनके सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि opt-out प्रक्रिया व्यवहार में कैसे काम करेगी।
FAQ
1. APAAR ID क्या है?
यह "One Nation, One Student ID" के तहत हर छात्र को दिया जाने वाला 12 अंकों का डिजिटल कोड है, जो प्री-प्राइमरी से कॉलेज तक की पढ़ाई का रिकॉर्ड रखता है।
2. क्या APAAR ID बनवाना अनिवार्य है?
सरकार इसे ऐच्छिक बताती है, और सुप्रीम कोर्ट ने भी CBSE को इसे पूरी तरह स्वैच्छिक रखने का निर्देश दिया है। हालांकि CBSE ने इसे 2026-27 सत्र से परीक्षा पंजीकरण (LOC) से जोड़ दिया है, जिससे व्यवहार में यह ज़रूरी होती जा रही है।
3. सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने CBSE को निर्देश दिया कि वह ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले को पूरे देश में लागू करे और सहमति फॉर्म में सहमति से इनकार व opt-out का स्पष्ट विकल्प जोड़े।
4. अगर मैंने पहले सहमति दे दी है, तो क्या अब वापस ले सकते हैं?
उपलब्ध जानकारी में इसकी स्पष्ट पुष्टि नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत लिखित आदेश और CBSE का संशोधित फॉर्म अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
5. APAAR ID कैसे बनवाएं?
स्कूल में डेमोग्राफिक वेरिफिकेशन कराएं, नाबालिग होने पर माता-पिता की सहमति दें, फिर ID जनरेट होकर DigiLocker से लिंक हो जाती है।
6. क्या APAAR ID के बिना बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरा जा सकता है?
CBSE की मौजूदा नीति के अनुसार 2026-27 सत्र से कक्षा 9-12 के LOC पंजीकरण के लिए APAAR ID अनिवार्य होगी, इसलिए बिना ID के फॉर्म भरना मुश्किल हो सकता है।