PM SHRI यानी प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया योजना अब अपने पांचवें और आखिरी साल में है। जुलाई 2026 तक देशभर में 13,092 स्कूल इस योजना के तहत चुने जा चुके हैं, यानी 14,500-से-ज़्यादा के तय लक्ष्य का करीब 90 हिस्सा पूरा हो गया है। लेकिन आंकड़ों के पीछे एक दूसरी कहानी भी चल रही है - केरल और तमिलनाडु में इस योजना को लेकर जो टकराव पिछले तीन साल से चल रहा था, वह सितंबर 2026 में फिर सुर्खियों में है।
PM SHRI है क्या
7 सितंबर 2022 को शुरू हुई यह केंद्र प्रायोजित योजना शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के तहत चलती है। मकसद साफ है - मौजूदा सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करके उन्हें ऐसे "मॉडल स्कूल" में बदलना जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को असल में लागू करके दिखाएं। ये स्कूल आसपास के दूसरे स्कूलों के लिए मेंटर की तरह काम करने वाले हैं, यानी सिर्फ अपने यहां सुधार नहीं, बल्कि पड़ोस के स्कूलों तक भी उसका असर पहुंचाना।
बजट और पांच साल का सफर
योजना का कुल खर्च ₹27,360 करोड़ है, 2022-23 से 2026-27 तक फैला हुआ, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹18,128 करोड़ है। दिलचस्प बात यह है कि सालाना आवंटन लगातार बढ़ता गया है - 2023-24 में जहां केंद्रीय हिस्सा ₹2,520 करोड़ था, वह 2026-27 में बढ़कर ₹5,224 करोड़ हो गया, यानी करीब 107% की बढ़ोतरी। इससे साफ है कि योजना अपने आखिरी साल में सबसे ज़्यादा रफ्तार पकड़ रही है।
देशभर में अब तक क्या हुआ
जुलाई 2026 तक चुने गए 13,092 स्कूलों में से 1,305 प्राइमरी, 3,102 अपर प्राइमरी, 3,141 सेकेंडरी और 5,544 हायर सेकेंडरी स्तर के हैं। इनमें 80 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय संगठन के 913, नवोदय विद्यालय समिति के 620 और NCERT के 4 स्कूल भी शामिल हैं। यह नेटवर्क 725 जिलों और 8,340 ब्लॉक/शहरी स्थानीय निकायों तक फैला है - यानी देश के लगभग हर कोने में इसकी मौजूदगी है।
कौन से राज्य आगे, कौन पीछे
यह हिस्सा ज़्यादातर लेखों में नहीं मिलेगा, लेकिन असल तस्वीर समझने के लिए ज़रूरी है। PIB के सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश 1,888 स्कूलों के साथ सबसे आगे है, इसके बाद महाराष्ट्र (946) और मध्य प्रदेश (944) का नंबर आता है। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में सिर्फ 6 और लक्षद्वीप में 13 स्कूल चुने गए हैं - जो जाहिर तौर पर उनके छोटे आकार से भी जुड़ा है। यह अंतर सिर्फ आबादी का नहीं, बल्कि यह भी दिखाता है कि कौन से राज्यों ने चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया में ज़्यादा स्कूल भेजे और तैयार किए।
स्कूल चुने कैसे जाते हैं
चयन "चैलेंज मोड" से होता है, तीन चरणों में:
- पहला चरण: राज्य/केंद्रशासित प्रदेश केंद्र के साथ एक MoU साइन करता है, जिसमें तय मानकों को पूरा करने की प्रतिबद्धता होती है।
- दूसरा चरण: UDISE+ डेटा के आधार पर पात्र स्कूलों की पहचान होती है।
- तीसरा चरण: पात्र स्कूल आपस में मुकाबला करते हैं - शहरी क्षेत्र के स्कूलों को कम-से-कम 70% स्कोर और ग्रामीण स्कूलों को 60% स्कोर हासिल करना होता है, जिसकी भौतिक जांच राज्य/KVS/NVS अधिकारी करते हैं। आखिरी मंजूरी शिक्षा मंत्रालय में सचिव (SE&L) की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी देती है।
पक्का भवन, बाधा-रहित पहुंच, अलग शौचालय, पीने का पानी, बिजली, शिक्षकों के ID कार्ड और राज्य औसत से ज़्यादा नामांकन - ये कुछ न्यूनतम शर्तें हैं जिन्हें पूरा करना ज़रूरी है।
छह स्तंभ
NEP 2020 के नौ अध्यायों से निकले छह स्तंभों पर यह योजना खड़ी है - समावेशी शिक्षा, मेंटरशिप, ग्रीन स्कूल, अनुभव-आधारित पढ़ाई, सीखने के नतीजे, और गुणवत्तापूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर। भाषा के मोर्चे पर भी काम हो रहा है - UDISE+ 2025-26 के अनुसार इन स्कूलों में 6,102 संस्कृत, 1,994 उर्दू और 9,152 क्षेत्रीय भाषा शिक्षक कार्यरत हैं, जो मातृभाषा में शुरुआती पढ़ाई के NEP लक्ष्य से जुड़ा है।
शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए DIET को प्रति संस्थान ₹3 लाख तक और प्रति शिक्षक ₹2,500 तक सहायता दी जाती है, जिसमें होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, स्कूल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और ICT जैसे विषय शामिल हैं।
राजस्थान में PM SHRI
राजस्थान के पाठकों के लिए सबसे काम की बात यह है - राज्य को ₹1,500 करोड़ के आवंटन से 716 स्कूल PM SHRI के तहत विकसित करने की मंज़ूरी मिली थी। इस साल राज्य में इससे जुड़ी भर्ती गतिविधि भी तेज़ रही - अप्रैल-मई 2026 में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने शाला दर्पण पोर्टल के ज़रिए प्रधानाचार्य, वरिष्ठ अध्यापक और पुस्तकालयाध्यक्ष सहित 14 श्रेणियों में हजारों पदों पर प्रतिनियुक्ति (placement/transfer) के लिए आवेदन मांगे थे। जो शिक्षक इन स्कूलों में जाना चाहते हैं, उनके लिए यह पोर्टल ही आधिकारिक ज़रिया है - जब भी अगला चक्र खुलेगा, आवेदन वहीं से होगा।
वह विवाद जो ज़्यादातर लेखों में नहीं है
PM SHRI की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। तीन राज्य - केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल - लंबे समय तक इससे दूर रहे। केरल ने अक्टूबर 2025 में, तीन साल के प्रतिरोध के बाद, आखिरकार MoU पर दस्तखत किए। लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं हुई। सितंबर 2026 में राज्य में सरकार बदलने के बाद - LDF की जगह अब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार है - केंद्र और राज्य के बीच फिर तनाव बढ़ा है। केंद्रीय शिक्षा सचिव ने 11 सितंबर 2026 को केरल के मुख्य सचिव को दूसरा पत्र भेजकर योजना को जल्द लागू करने को कहा। एक दिन पहले हुई कांग्रेस नेताओं की बैठक में कई नेताओं ने आरोप लगाया कि यह योजना केंद्र के राजनीतिक एजेंडे को राज्यों में लागू करने का ज़रिया बन सकती है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का रुख अलग है - उनका कहना है कि पिछली LDF सरकार पहले ही MoU साइन कर चुकी है, इसलिए अब राज्य पीछे नहीं हट सकता।
तमिलनाडु का मामला अलग और पुराना है। राज्य सरकार का कहना रहा है कि उसने कभी औपचारिक रूप से योजना लागू करने पर सहमति नहीं दी। असली एतराज़ NEP की तीन-भाषा फॉर्मूले पर है, जिसे तमिलनाडु हिंदी थोपने की एक परोक्ष कोशिश मानता आया है - जबकि केंद्र का कहना है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जा रही। इस विवाद का असर पैसों पर भी पड़ा - मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्य के ₹2,152 करोड़ रोके जाने को "दबाव बनाने" की कोशिश बताया था। संसद में भी यह मुद्दा एक बार गरमाया, जब केंद्रीय मंत्री और DMK सांसदों के बीच तीखी बहस के बाद कुछ टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटानी पड़ीं।
यहां एक बात साफ समझनी ज़रूरी है: यह राजनीतिक असहमति योजना की डिज़ाइन का हिस्सा नहीं, बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों और भाषा नीति को लेकर पुराने मतभेद का विस्तार है। उपलब्ध जानकारी में यह पुष्टि नहीं है कि आने वाले महीनों में तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल इस पर दस्तखत करेंगे या नहीं।
आगे क्या
योजना का पांचवां और आखिरी बजट वर्ष 2026-27 है। बचे हुए करीब 10% लक्ष्य को पूरा करना, और साथ ही जो राज्य अब भी बाहर हैं उन्हें साथ लाना - दोनों मोर्चों पर अगले कुछ महीने अहम रहने वाले हैं।
FAQ
1. PM SHRI योजना कब शुरू हुई थी?
7 सितंबर 2022 को, टीचर्स डे के मौके पर इसकी घोषणा हुई थी।
2. PM SHRI योजना का कुल बजट कितना है?
पांच साल (2022-23 से 2026-27) के लिए कुल ₹27,360 करोड़, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹18,128 करोड़ है।
3. अभी तक कितने स्कूल PM SHRI के तहत चुने जा चुके हैं?
जुलाई 2026 तक 13,092 स्कूल, जो तय लक्ष्य का करीब 90% है।
4. राजस्थान में PM SHRI के तहत कितने स्कूल विकसित हो रहे हैं?
राजस्थान को ₹1,500 करोड़ के आवंटन से 716 स्कूल विकसित करने की मंज़ूरी मिली थी।
5. सारे राज्य PM SHRI में शामिल क्यों नहीं हैं?
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने अब तक MoU साइन नहीं किया है। तमिलनाडु का मुख्य एतराज़ NEP की तीन-भाषा नीति को लेकर है, जिसे वह हिंदी थोपने की कोशिश मानता है। केरल ने अक्टूबर 2025 में दस्तखत किए, लेकिन सितंबर 2026 में वहां की नई सरकार के रुख को लेकर केंद्र और राज्य के बीच फिर खिंचाव देखा गया।
6. PM SHRI स्कूल कैसे चुने जाते हैं?
तीन-चरण की "चैलेंज मोड" प्रक्रिया से - MoU साइनिंग, UDISE+ आधारित पात्रता जांच, और फिर स्कोर-आधारित मुकाबला (शहरी में 70%, ग्रामीण में 60% न्यूनतम स्कोर)।