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नेपाल में तबाही की असली वजह आई सामने: झील नहीं, ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़, चीन-भारत भी हुए सहमत

नेपाल-चीन बाढ़ की असली वजह सामने आई। झील फटने या एवलांच नहीं, भूकंप के बाद टूटे ग्लेशियर से भोटेकोशी नदी में आई तबाही। जानें पूरी रिपोर्ट, मृतकों का आंकड़ा और आगे का खतरा।
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नेपाल में तबाही की असली वजह आई सामने: झील नहीं, ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़, चीन-भारत भी हुए सहमत
नेपाल में तबाही की असली वजह आई सामने: झील नहीं, ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़, चीन-भारत भी हुए सहमत
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights & Quick Summary)
  • नेपाल-चीन बाढ़ की असली वजह सामने आई। झील फटने या एवलांच नहीं, भूकंप के बाद टूटे ग्लेशियर से भोटेकोशी नदी में आई तबाही। जानें पूरी रिपोर्ट, मृतकों का आंकड़ा और आगे का खतरा।
  • शुरुआत में माना जा रहा था कि किसी ग्लेशियल झील के फटने या हिमस्खलन (एवलांच) की वजह से यह तबाही मची, लेकिन सैटेलाइट डेटा और भूवैज्ञानिक जांच के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
  • चीन, नेपाल और भारत की वैज्ञानिक एजेंसियों ने अब लगभग एक जैसा निष्कर्ष निकाला है — ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटना ही इस आपदा की असली जड़ है।
  • कैसे शुरू हुई तबाही की कहानी 26 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के उत्तरी जिले रसुवा में भोटेकोशी नदी अचानक उफान पर आ गई।

नेपाल में तबाही की असली वजह आई सामने: झील नहीं फटी, न ही एवलांच — भूकंप के बाद टूटा ग्लेशियर बना बाढ़ का कारण, चीन और भारत की एजेंसियां भी हुईं सहमत

नेपाल-चीन सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड को लेकर लंबे समय से चली आ रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। शुरुआत में माना जा रहा था कि किसी ग्लेशियल झील के फटने या हिमस्खलन (एवलांच) की वजह से यह तबाही मची, लेकिन सैटेलाइट डेटा और भूवैज्ञानिक जांच के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। चीन, नेपाल और भारत की वैज्ञानिक एजेंसियों ने अब लगभग एक जैसा निष्कर्ष निकाला है — ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटना ही इस आपदा की असली जड़ है।

कैसे शुरू हुई तबाही की कहानी

26 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के उत्तरी जिले रसुवा में भोटेकोशी नदी अचानक उफान पर आ गई। तिब्बत से बहकर आने वाले इस सैलाब ने सीमा के नजदीक बसे तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों को चंद घंटों में तबाह कर दिया। गांव के गांव पानी में समा गए, बाजार उजड़ गए और कई अहम पुल पूरी तरह बह गए।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बताया कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों ने आपदा का शुरुआती संयुक्त आकलन पूरा कर लिया है, जिसमें ऊंचाई वाले क्षेत्र में हुए ग्लेशियर विस्फोट (ग्लेशियल बर्स्ट) को मुख्य वजह बताया गया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की स्वतंत्र जांच में भी ग्लेशियर टूटने और उसके बाद मलबे के बहाव को ही बाढ़ की वजह माना गया है।

भूकंप ने दिया ट्रिगर, फिर बनी और टूटी 'प्राकृतिक दीवार'

अब तक की सबसे अहम कड़ी भारतीय वैज्ञानिकों की जांच से जुड़ी है। इसरो से संबद्ध नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के विशेषज्ञों के मुताबिक, 26 अगस्त की सुबह रसुवा क्षेत्र में करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ था। माना जा रहा है कि इसी भूकंप के झटकों ने ऊंचाई पर पहले से कमजोर पड़ चुके ग्लेशियर को तोड़ दिया। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल-2 और भारत के रिसोर्ससैट-2ए उपग्रहों से मिली तस्वीरों के आधार पर वैज्ञानिकों ने इस विश्लेषण की पुष्टि की है।

बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर ल्हेंदे नदी में जा गिरा, जिससे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक गया और मलबे से एक अस्थायी, प्राकृतिक बांध जैसी दीवार बन गई। जब यह दीवार दबाव नहीं झेल पाई और टूटी, तो भारी मात्रा में पानी एक साथ नीचे की ओर बहा। अनुमान है कि इस घटना में करीब 2 करोड़ घनमीटर यानी लगभग 2,000 करोड़ लीटर पानी अचानक भोटेकोशी नदी में आ गया, जिसने आगे त्रिशूली नदी तक तबाही का रास्ता बना दिया।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे नई-नई ग्लेशियल झीलें बन रही हैं। ये झीलें किसी भी वक्त फट सकती हैं और नीचे की घाटियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी मीन कुमार अर्याल ने साफ किया है कि इस बार स्थानीय बारिश इस तबाही की वजह नहीं थी।

मरने वालों की संख्या 500 पार, सैकड़ों अब भी लापता

इस आपदा ने अब तक भयावह रूप ले लिया है। नेपाल में मरने वालों की संख्या 547 से ज्यादा हो चुकी है और बड़ी तादाद में लोग अब भी लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ से 5 लोगों की जान गई है, जबकि वहां 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। भारत के लिए यह आपदा और भी करीबी झटका बनकर आई है — रिपोर्टों के मुताबिक करीब 320 भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं, वहीं भोपाल के एक ही परिवार के 29 सदस्य भी इनमें शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिक चीन के इलाके में फंसे होने की खबर है।

चीन ने बताया कि उसके ग्यिरोंग काउंटी क्षेत्र से 1,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें लगभग 555 पर्यटक शामिल थे। फिलहाल इस इलाके में कोई पर्यटक फंसा हुआ नहीं बताया जा रहा।

खतरा अभी टला नहीं — नई झील ने फिर बढ़ाई चिंता

राहत की बात इतनी भर है कि तबाही की वजह अब साफ हो चुकी है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। काठमांडू स्थित संस्था आईसीआईएमओडी ने चेतावनी दी है कि नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के ऊपरी हिस्से में अब भी एक अवरोध (मलबे का जमाव) फंसा हुआ है, जिससे बाढ़ की एक और लहर आने का खतरा बना हुआ है।

इस आशंका को उस वक्त और बल मिला जब खबर आई कि चीन के ग्यिरोंग इलाके में ग्लेशियर के टूटने से बनी एक झील अचानक ओवरफ्लो होने लगी। इस खतरे के चलते बचाव एजेंसियों को हेलीकॉप्टर से चल रहा रेस्क्यू अभियान करीब 90 मिनट के लिए रोकना पड़ा। नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले में इस झील के ओवरफ्लो का असर पहले से ही दिखने लगा है, जिससे नदी किनारे के इलाकों में फिर से अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को नदी के आसपास न जाने की सलाह दी गई है।

 

चीन ने जताई संवेदना, मदद का दिया भरोसा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को संवेदना संदेश भेजते हुए इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के लोगों के साथ खड़े होने की बात कही है। शी जिनपिंग की अध्यक्षता में हुई कम्युनिस्ट पार्टी की एक बैठक में भी इस आपदा पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि यह क्षेत्र बेहद ठंडा, ऊंचाई वाला और खड़ी घाटियों से भरा है, जहां कई ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं और मौसम भी बेहद तेजी से बदलता रहता है — यही वजह है कि यहां राहत और बचाव अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

चीन ने अपने सभी संबंधित विभागों को असरदार तरीके से राहत और बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, साथ ही लापता चीनी और विदेशी नागरिकों की तलाश तेज करने पर भी जोर दिया है। चीन ने नेपाल को आपातकालीन सहायता देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बचाव कार्यों में सहयोग करने का भरोसा भी दिलाया है।

आगे क्या है सबसे बड़ी चुनौती

फिलहाल राहत और बचाव टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश और दुर्गम इलाकों तक मदद पहुंचाना है। भोटेकोशी और त्रिशूली समेत आसपास की नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। वैज्ञानिकों और स्थानीय प्रशासन को आशंका है कि ऊंचाई वाले इलाकों में अब भी मौजूद प्राकृतिक जल-अवरोधों और मलबे के जमाव के चलते आने वाले दिनों में एक और अचानक बाढ़ की घटना हो सकती है, इसलिए संबंधित इलाकों में सतर्कता और अलर्ट का स्तर ऊंचा बनाए रखा गया है।

यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी बयानों, वैज्ञानिक विश्लेषणों (इसरो/NRSC, USGS, ICIMOD) और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए ताज़ा अपडेट के लिए संबंधित आधिकारिक स्रोतों को फॉलो करें।

📊 त्वरित विवरण एवं तथ्य (Quick Facts & Overview)
श्रेणी / CategoryWorld
प्रकाशन तिथि / Published28 August 2026, 11:44 PM
लेखक / Bylinepp singh (Verified)
सत्यापन / Fact Check✔ Verified by TALKAAJ Editorial Desk
पढ़ने का समय / Read Time1 min read
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pp singh • Senior Reporter

Founder & Editor-in-Chief of TAL KAAJ News, dedicated to delivering accurate, timely and independent journalism with a focus on important national and regional developments.

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