जादवपुर यूनिवर्सिटी में 'आजादी' के नारों पर सीएम शुभेंदु सख्त, बोले- ऐसे लोगों को कचरे की तरह साफ कर देना चाहिए
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। रक्षाबंधन के मौके पर भवानीपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कैंपस में धमकाने वाला चलन अब बहुत हो चुका, इसे खत्म करने का वक्त आ गया है। इस कार्यक्रम में करीब 10 हजार लोग जुटे थे और सबने मिलकर 'वंदे मातरम' गाया।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में साफ कह दिया कि जो लोग देश के भीतर रहकर राष्ट्रवाद, वंदे मातरम और जन गण मन पर हमला करते हैं, उन्हें घर के कचरे की तरह साफ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाहरी दुश्मनों को तो सेना अपनी ताकत दिखा ही चुकी है, लेकिन देश के अंदर बैठे ऐसे तत्वों से भी अब सख्ती से निपटना होगा।
आजादी के नारे सुनकर होती है पीड़ा
शुभेंदु ने कहा कि जब भी वो कोलकाता की सड़कों पर 'आजादी' के नारे देखते हैं तो उन्हें बहुत तकलीफ होती है। उन्होंने पूछा कि आखिर ये आजादी किस बात की मांगी जा रही है, जब देश तो 1947 में ही आजाद हो चुका। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संघर्ष और मातंगिनी हाजरा के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को ये सब भूलना नहीं चाहिए। जादवपुर यूनिवर्सिटी और कोलकाता की सड़कों पर कश्मीर से जुड़े नारे क्यों लगाए जा रहे हैं, ये सवाल उन्होंने सीधे उठाया।
किशनजी वाली दीवार पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के आर्ट डिपार्टमेंट की दीवार पर बने 'लाल सलाम किशनजी' वाले चित्र को लेकर भी नाराजगी जताई। किशनजी असल में कोटेश्वर राव थे, एक सीनियर माओवादी लीडर, जिनकी नवंबर 2011 में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। ये घटना ममता बनर्जी सरकार बनने के कुछ ही महीने बाद हुई थी। शुभेंदु ने कहा कि ऐसे शख्स की तस्वीर यूनिवर्सिटी की दीवार पर देखकर दुख होता है, क्योंकि किशनजी वही व्यक्ति था जिसने देश के बंटवारे की मांग की थी और संविधान को कभी माना ही नहीं। उन्होंने पूछा कि आखिर नई पीढ़ी को इस तरह की चीजें दिखाकर क्या सिखाया जा रहा है।
पिछले हफ्ते भी शुभेंदु ने एक कार्यक्रम में कहा था कि इंकलाब जिंदाबाद कहने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन आजादी या कश्मीर मांगे आजादी जैसे नारे लगाए तो सीधे केस दर्ज होगा और गिरफ्तारी भी हो सकती है।
विपक्ष पर भी बोला हमला
इसी दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष से भी सवाल पूछा कि आखिर वो वंदे मातरम के पूरे वर्जन का विरोध क्यों करता है। बता दें कि जादवपुर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ सालों से छात्र आंदोलनों और वैचारिक टकराव को लेकर लगातार चर्चा में रही है। मई 2026 में बीजेपी की जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, और तब से ही राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में लगातार गरमाए हुए हैं।
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