West Bengal Health Scheme (WBHS) 2026: कैशलेस लिमिट ₹5 लाख, पात्रता, रजिस्ट्रेशन और क्लेम की पूरी जानकारी
West Bengal Health Scheme (WBHS) पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके पात्र आश्रितों के लिए वित्त विभाग की स्वास्थ्य योजना है। यह आम जनता के लिए नहीं है। ताज़ा बदलाव यह है कि 1 अक्टूबर 2026 या उसके बाद निजी सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज़ों के लिए कैशलेस सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है।
इस विषय पर कई लोकप्रिय लेख अब भी ₹1 लाख या ₹1.5 लाख की सीमा लिखते हैं। एक बड़ी बीमा वेबसाइट का लेख अभी भी ₹1 लाख बताता है, जबकि दूसरा ₹1.5 लाख लिखता है। ये आँकड़े पुराने हैं। नीचे हर आँकड़ा सरकारी पोर्टल या आदेश की तारीख के साथ दिया गया है।
मुख्य बातें
- WBHS सिर्फ राज्य कर्मचारियों, पेंशनरों, फैमिली पेंशनरों, AIS अधिकारियों और उनके आश्रितों के लिए है।
- कैशलेस सीमा अभी ₹2 लाख है और 1 अक्टूबर 2026 से ₹5 लाख हो जाएगी।
- 7 सितंबर 2026 की अधिसूचना के बाद OPD में दवा का खर्च मिलने वाली बीमारियाँ 18 से बढ़कर 24 हो गई हैं।
- इलाज के बाद रीइम्बर्समेंट क्लेम आम तौर पर 3 महीने के भीतर देना होता है।
- रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन भरा जाता है, पर मंज़ूरी आपके दफ़्तर के Head of Office से मिलती है।
WBHS क्या है और किसने शुरू की
WBHS की शुरुआत वित्त विभाग के 19 सितंबर 2008 के आदेश (मेमो 7287-E) से हुई, इस शर्त पर कि कर्मचारी अपने वेतन से मेडिकल अलाउंस लेना छोड़ दे। 2009 में यह सुविधा रिटायर हो चुके और फैमिली पेंशनरों तक पहुँची, जिन्हें पेंशन से मेडिकल रिलीफ़ छोड़ना पड़ता है। 2009 और 2010 में इसमें IAS, IFS और IPS अधिकारी भी जोड़े गए, बशर्ते वे CGHS की सुविधा छोड़ दें।
2014 में योजना का नाम "West Bengal Health for All Employees and Pensioners Cashless Medical Treatment Scheme 2014" कर दिया गया और कैशलेस सुविधा जुड़ी। पोर्टल पर आज भी दोनों नाम चलते हैं, इसलिए दस्तावेज़ों में कभी WBHS-2008 और कभी 2014 पढ़कर उलझने की ज़रूरत नहीं।
योजना का संचालन वित्त विभाग का मेडिकल सेल करता है। पोर्टल के होमपेज पर दिखे काउंटर के मुताबिक 2,37,983 कर्मचारी और 8,25,086 लाभार्थी दर्ज हैं। यह काउंटर लगातार बदलता रहता है, इसलिए इसे अंदाज़े की तरह पढ़ें।
सितंबर 2026 में क्या-क्या बदला
पिछले डेढ़ महीने में एक के बाद एक चार आदेश आए हैं। सब एक जगह देख लें:
| बदलाव | आदेश और तारीख | कब से लागू |
|---|---|---|
| इलाज की अनुमोदित दरों का संशोधन | नोटिफिकेशन 70-F(MED)/WB, 14.08.2026 | दर सूची "As on 01.09.2026", तीन टियर वाले कॉलम के साथ |
| OPD की बीमारियाँ 18 से 24 | मेडिकल सेल की अधिसूचना, 7 सितंबर 2026 | जारी होने की तारीख से |
| Non-Pecuniary Beneficiary नई श्रेणी | 78-F(MED)WB, 11 सितंबर 2026 | 1 अक्टूबर 2026 |
| कैशलेस सीमा ₹2 लाख से ₹5 लाख | मेडिकल सेल की अधिसूचना, 17 सितंबर 2026 | 1 अक्टूबर 2026 से |
इनके अलावा 2 जून 2026 के आदेश 51-F(MED)WB में नामांकन और एनरोलमेंट सर्टिफिकेट की अपडेट की समय-सीमा तय हुई। उसकी बात आगे रजिस्ट्रेशन वाले हिस्से में है।
कैशलेस इलाज की सीमा: ₹2 लाख या ₹5 लाख?
जवाब इस पर टिका है कि आप किस तारीख को भर्ती हो रहे हैं।
आधिकारिक पोर्टल का फ़िलहाल का पेज कहता है कि प्रति भर्ती ₹2,00,000 तक कैशलेस इलाज मिलता है, बशर्ते इलाज निजी सूचीबद्ध अस्पताल में हो, और इससे ऊपर के खर्च का रीइम्बर्समेंट DDO या PSA को क्लेम देकर मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नई अधिसूचना में किसी भी अस्पताल में एक भर्ती के लिए अधिकतम ₹5 लाख तक कैशलेस सुविधा रहेगी और बाकी नियम पहले जैसे रहेंगे।
अधिसूचना के शब्दों से मेरा निष्कर्ष यह है कि जो मरीज़ 30 सितंबर तक भर्ती हुआ, उस पर ₹2 लाख वाली सीमा ही लगेगी। यह मेरी पढ़त है, आदेश का सीधा वाक्य नहीं। भर्ती से पहले अस्पताल के WBHS डेस्क से लिखित पुष्टि ले लें।
पात्रता: कौन कवर होता है
सीधे लाभार्थी:
- राज्य सरकार के कर्मचारी और पेंशनर, जिनमें फैमिली पेंशनर भी आते हैं।
- All India Services के अधिकारी। 2011 में रिटायर्ड AIS अधिकारियों को भी जोड़ा गया, CGHS छोड़ने और ₹40,000 के एकमुश्त योगदान की शर्त पर।
- ग्रांट-इन-एड कॉलेज और विश्वविद्यालयों के लाभार्थी। पोर्टल का शीर्षक इन्हें अलग से गिनाता है।
IAS, IPS और IFS अधिकारियों के लिए यह स्वैच्छिक है और CGHS में रहते हुए इसे नहीं लिया जा सकता।
आश्रित परिवार (शर्तें WBPay के संकलित FAQ से, जिसमें सरकारी मेमो के नंबर दिए हैं):
| आश्रित | शर्त |
|---|---|
| पति या पत्नी | बिना किसी आय-सीमा के |
| माता-पिता | सभी स्रोतों से मासिक आय ₹3,500 से ज़्यादा न हो; वे अलग शहर में रहते हों तब भी चलेगा |
| बच्चे (सौतेले और गोद लिए सहित), अविवाहित बेटियाँ | साथ रहते हों और उनकी मासिक आय ₹1,500 से ज़्यादा न हो |
| बेटा | कमाना शुरू करने या 25 साल का होने तक, जो पहले हो; स्थायी विकलांगता में आयु-सीमा नहीं |
| आश्रित विधवा या तलाकशुदा बेटी, अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बहन, नाबालिग भाई-बहन | आश्रित माने जाएँगे |
ये रकमें 2009 और 2010 के मेमो की हैं। बाद में संशोधन हुआ हो तो पोर्टल या HoO से मिलान कर लें।
कुछ खास स्थितियाँ:
- पति-पत्नी दोनों राज्य कर्मचारी हैं तो दोनों का स्कीम में आना अनिवार्य है, और एक-दूसरे के माता-पिता को साझा आश्रित नहीं बनाया जा सकता। हर कोई अपने माता-पिता को अलग से जोड़ता है।
- जीवनसाथी केंद्र सरकार, बैंक या किसी ऐसे संस्थान में है जहाँ मेडिकल सुविधा मिलती है, तो सुविधा सिर्फ एक जगह से ली जा सकती है और वहाँ की मेडिकल सुविधा छोड़ने का नियोक्ता का प्रमाणपत्र चाहिए।
- रिटायरमेंट में एक साल से कम बचा हो और आप स्कीम में हैं, तो आप रिटायरमेंट की तारीख से स्वतः जारी माने जाएँगे, जब तक खुद बाहर न निकलें।
रजिस्ट्रेशन कैसे होता है
लोग "WBHS ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन" खोजते हैं, पर पूरा काम अकेले ऑनलाइन नहीं होता। फॉर्म आप भरते हैं, मंज़ूरी दफ़्तर देता है।
- healthscheme.wb.gov.in पर जाकर Online Enrolment में अपनी श्रेणी चुनें, यानी सरकारी कर्मचारी या पेंशनर।
- PRAN या GPF नंबर हो तो "Yes" चुनकर डालें, नहीं हो तो Non-GPF चुनें।
- जन्मतिथि, ज़िला, नाम, पता, मोबाइल नंबर और कर्मचारी संख्या भरें, फिर दफ़्तर और आश्रितों का ब्योरा दें।
- फोटो 10 से 50 KB और हस्ताक्षर 8 से 50 KB के बीच, jpg में अपलोड करें, और सूची से ब्लड ग्रुप चुनें।
- सेव करके फॉर्म का प्रिंट रख लें।
- आपका Head of Office (पेंशनर के लिए PSA) जानकारी जाँचकर मंज़ूर करता है। इसके बाद फोटो, हस्ताक्षर और ब्लड ग्रुप वाला डिजिटली साइन किया हुआ Enrolment Certificate बनता है।
समय-सीमा पर ध्यान दें। होमपेज पर कभी ऑनलाइन नामांकन की आख़िरी तारीख 31 जनवरी 2026 तक बढ़ाई गई थी। फिर 2 जून 2026 के आदेश ने कर्मचारियों, पेंशनरों और AIS सदस्यों के लिए आख़िरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की, जबकि नए नियुक्त कर्मचारियों पर 2012 वाली अलग समय-सीमा चलती रहेगी। यानी अब तक नामांकन नहीं हुआ है तो अपने HoO से आज ही पूछें। कारण मैं नहीं बता सकता, वह उनके पास होगा।
आधार और सर्टिफिकेट: आदेश में HoO और PSA को कहा गया कि एनरोलमेंट सर्टिफिकेट में आधार नंबर भी जुड़वाएँ। पोर्टल का नोटिस भी आधार, फोटो, हस्ताक्षर और ब्लड ग्रुप अपडेट करने की याद दिलाता है।
WBHS कार्ड: जिन सरकारी आदेशों को मैंने देखा, उनमें दस्तावेज़ का नाम Enrolment Certificate है। कई वेबसाइटें इसे "कार्ड" कह देती हैं। इसे पोर्टल से डाउनलोड करके रखें और अस्पताल में दिखाएँ।
फॉर्म डाउनलोड: पोर्टल के Downloads पेज पर "Select Category" ड्रॉपडाउन से अपनी श्रेणी चुनकर फॉर्म मिल जाता है।
अस्पताल: कहाँ इलाज लिया जा सकता है
सूचीबद्ध निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर। पोर्टल के काउंटर में 204 निजी अस्पताल और 30 डायग्नोस्टिक सेंटर दिखते हैं। पूरी सूची पोर्टल के Hospitals सेक्शन में है, और डॉक्टरों का ब्योरा भी उसी सेक्शन में मिलता है। मैं यहाँ अस्पतालों के नाम नहीं गिना रहा, क्योंकि एम्पैनलमेंट का नवीनीकरण अब ऑनलाइन होता है और छपी हुई सूचियाँ जल्दी पुरानी पड़ जाती हैं। भर्ती से पहले पोर्टल पर अस्पताल की स्थिति देख लें।
बंगाल के बाहर। WBHS-08 के तहत राज्य के बाहर 11 सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है। इलाज की असल लागत के साथ एक अटेंडेंट समेत यात्रा का खर्च भी मिलता है। पहले अनुमति लेनी होती है, पर टाटा मेमोरियल, AIIMS दिल्ली और NIMHANS में सिर्फ विभाग सचिव की मंज़ूरी चाहिए।
गैर-सूचीबद्ध अस्पताल (राज्य के भीतर)। अनुमोदित लागत का 60 प्रतिशत या असल भुगतान, जो कम हो, मिलता है। 80 से ज़्यादा बिस्तर वाले अस्पताल में यह 80 प्रतिशत है। शर्त यह है कि इलाज के दिन अस्पताल के पास West Bengal Clinical Establishment Act का वैध लाइसेंस हो। मई 2025 से Annexure-II फॉर्म पोर्टल से बिना लॉगिन डाउनलोड होता है, आप पहले अपना हिस्सा भरते हैं और फिर अस्पताल उसे प्रमाणित करता है।
कैशलेस क्लेम की प्रक्रिया
सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती होते वक्त एनरोलमेंट सर्टिफिकेट और पहचान पत्र दिखाएँ। बाकी काम अस्पताल का है: राज्य के भीतर सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज की अनुमति अस्पताल खुद माँगता है, और बिल सारे ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ वित्त विभाग के मेडिकल सेल को भेजता है। मेडिकल सेल बिल की स्वीकार्य राशि तय करके भुगतान करता है।
इलाज शुरू करने से पहले इन मामलों में WBHS प्राधिकरण से पूर्व अनुमति चाहिए (अंग प्रत्यारोपण, कॉक्लियर इम्प्लांट, डुअल चैंबर पेसमेकर, दो से ज़्यादा स्टेंट या एक से ज़्यादा ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट, AICD, CRT के साथ AICD, ब्रेन स्टिमुलेटर जैसे न्यूरो इम्प्लांट, और राज्य के बाहर के स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज)। इसके अलावा जिन इलाजों का कोई तय पैकेज नहीं है और खर्च ₹2.5 लाख से ऊपर जाए, या एक साथ दो से ज़्यादा पैकेज करने हों, वहाँ भी अनुमति लगती है।
अगर किसी सर्जरी का पैकेज रेट नहीं है, तो अस्पताल मेडिकल सेल से "identical code" माँगता है और क्लेम उससे मिलती-जुलती प्रक्रिया के रेट पर बनता है।
सीमा से ऊपर के खर्च के लिए एक अलग दस्तावेज़ है, CARC (Cashless Admissible Reimbursement Certificate)। सीमा से ऊपर जो रकम आपने अस्पताल को खुद चुकाई, उसकी स्वीकार्य राशि का CARC आपके DDO के लॉगिन से बनता है, और सीमा के भीतर के बिलों पर CARC नहीं बनता। FAQ में यह प्रक्रिया पुरानी सीमा के हिसाब से लिखी है। ₹5 लाख की नई सीमा के बाद इसकी शर्तें कैसे बैठेंगी, यह मुझे किसी आदेश में साफ़ नहीं दिखा।
रीइम्बर्समेंट और क्लेम की समय-सीमा
| इलाज का प्रकार | क्लेम की समय-सीमा |
|---|---|
| भर्ती वाला इलाज | डिस्चार्ज की तारीख से 3 महीने |
| OPD | हर OPD विज़िट से 3 महीने |
| लंबे समय की दवा | खरीद की तारीख से 3 महीने; बंगाल के बाहर के स्पेशियलिटी अस्पताल की पर्ची पर अधिकतम 6 महीने |
देरी हो जाए तो रास्ता बंद नहीं होता। 3 महीने से एक साल तक की देरी प्रशासनिक विभाग के प्रमुख माफ़ कर सकते हैं, और एक साल से ऊपर की देरी की फ़ाइल मेडिकल सेल तक जाती है।
भर्ती से जुड़ा OPD खर्च: भर्ती से 30 दिन पहले और डिस्चार्ज के 30 दिन बाद तक का संबंधित OPD खर्च रीइम्बर्स होता है। कुछ जाँचें, जो सूचीबद्ध अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में हों, किसी भी बीमारी में OPD पर्ची के आधार पर रीइम्बर्स होती हैं।
एडवांस: कर्मचारी को अनुमानित लागत का अधिकतम 80 प्रतिशत एडवांस मिल सकता है, सिर्फ भर्ती वाले इलाज (डे-केयर सहित) और सूचीबद्ध अस्पताल के लिए। 60 दिन में इलाज नहीं हुआ तो पूरा एडवांस लौटाना पड़ता है। पेंशनरों के लिए नियम अलग है: बड़ी बीमारी में एडवांस सिर्फ सरकारी अस्पताल के इलाज पर मिलता है।
क्लेम अब ऑनलाइन जमा होते हैं। यह सुविधा 1 जुलाई 2022 से शुरू है।
OPD में कौन-सी बीमारियाँ कवर हैं (अब 24)
WBHS में हर OPD खर्च रीइम्बर्स नहीं होता। सिर्फ तय बीमारियों का होता है। शुरुआती WBHS-08 में यह सूची 18 बीमारियों की थी। 7 सितंबर 2026 की अधिसूचना में छह और जुड़ीं: पैंक्रियाटाइटिस, ऑस्टियोआर्थ्राइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस, ग्लूकोमा, इडियोपैथिक पल्मोनरी फ़ाइब्रोसिस (IPF) और कनेक्टिव टिश्यू डिज़ीज़ (CTD)। CTD में सिस्टेमिक स्क्लेरोसिस, CTD से जुड़ी इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़, शोग्रेन सिंड्रोम और डर्मेटोमायोसाइटिस या पॉलीमायोसाइटिस गिने गए हैं।
पहले से सूची में कैंसर, टीबी, हेपेटाइटिस बी और सी समेत लिवर के रोग, टाइप-1 डायबिटीज़, हृदय रोग, स्नायु रोग, मैलिग्नेंट मलेरिया, किडनी रोग, थैलेसीमिया, दुर्घटना की चोट, रूमेटॉयड आर्थ्राइटिस, ल्यूपस, क्रोन्स, रूट कैनाल, COPD, एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस, कोविड-19 और कुछ न्यूरोसाइकियाट्रिक रोग थे।
दो बातें ध्यान में रखें:
- पूरा खर्च वापस नहीं मिलता। ग्लूकोमा की दवा पर महीने का ₹1,500 लगता हो, तब भी वापसी योजना के अनुमोदित रेट और लागू सीमा के हिसाब से होगी।
- डायबिटीज़ में इंसुलिन पर निर्भर मरीज़ ही आते हैं। WBPay की 2022 की सूची में लिखा है कि सिर्फ इंसुलिन-निर्भर डायबिटीज़ का इलाज रीइम्बर्स होता है। सूची तब से बदली हो सकती है, इसलिए पुष्टि कर लें।
डॉक्टर की पर्ची पर नियम: जुलाई 2025 के corrigendum (104-F(MED)WB) से पहले आदेश में "Treating Specialist" लिखा था, और कई ट्रेज़री दफ़्तर जनरल फ़िज़िशियन या मेडिकल ऑफ़िसर की पर्ची पर बिल लौटा देते थे। संशोधन से यह अड़चन खत्म हो गई। शर्त इतनी है कि बीमारी तय सूची में हो और सारी दवाएँ एक ही पर्ची पर लिखी हों।
Non-Pecuniary Beneficiary: 25 साल के बाद बच्चों का क्या?
अभी तक बेटा 25 साल का होते ही या आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होते ही स्कीम से बाहर हो जाता था, और बेटी की शादी हो जाने या कमाई शुरू होने पर उसका नाम कट जाता था। बाहर होने के बाद निजी अस्पताल के बाज़ार रेट झेलने पड़ते थे।
1 अक्टूबर 2026 से नई श्रेणी आ रही है। इसमें:
- ऐसे बच्चे सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में WBHS के अनुमोदित रेट पर इलाज पा सकेंगे, पर कोई कैशलेस सुविधा या रीइम्बर्समेंट नहीं मिलेगा। पूरा खर्च परिवार को देना होगा।
- यह वैकल्पिक है, कर्मचारी या पेंशनर आवेदन करे तभी लागू होगा।
- बेटे के लिए आवेदन 25वें जन्मदिन से ठीक एक महीने पहले करना होगा। बेटी के लिए विवाह या कमाई की सूचना देते समय ही।
- मंज़ूरी पर संशोधित एनरोलमेंट सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जिस पर "Non-Pecuniary Beneficiary" लिखा रहेगा।
यह सरकारी सहायता नहीं है, सिर्फ सस्ते तय रेट पर इलाज की सुविधा है। मुझे यह सही दिशा का बदलाव लगता है, पर इसका फ़ायदा उसी को होगा जो समय पर आवेदन करे। बेटे की 25वीं सालगिरह के एक महीने पहले की समय-सीमा चूक गए तो मौक़ा निकल जाता है, इसलिए घर में यह तारीख़ लिखकर रख लें।
WBHS, Swasthya Sathi और Ayushman Bharat में फ़र्क
पश्चिम बंगाल में इन दिनों तीनों नाम सुनाई देते हैं, इसलिए उलझन स्वाभाविक है।
| योजना | किसके लिए | कवर |
|---|---|---|
| WBHS | राज्य कर्मचारी, पेंशनर, आश्रित | कैशलेस सीमा ₹2 लाख (1 अक्टूबर से ₹5 लाख) प्रति भर्ती, साथ में रीइम्बर्समेंट |
| Ayushman Bharat PM-JAY | पात्र परिवार; पात्रता SECC 2011 के आधार पर तय होती है | प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख |
| Mukhyamantri Swasthya Bima Yojana | जो लोग Ayushman Bharat के दायरे में नहीं आते | राज्य की बीमा योजना |
पश्चिम बंगाल में Ayushman Bharat 16 अगस्त 2026 से शुरू हुआ। Swasthya Sathi के बारे में रिपोर्टें थोड़ी अलग हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक वह कुछ महीने साथ चलेगी और फिर चरणबद्ध तरीक़े से हटेगी, जबकि दूसरी रिपोर्ट उसे बदली जा चुकी योजना बताती है। इस पर अंतिम बात पोर्टल और आदेश से ही पक्की होगी। WBHS इन दोनों से अलग वित्त विभाग की योजना है। एक व्यक्ति दोनों का लाभ ले सकता है या नहीं, यह मुझे किसी आदेश में साफ़ नहीं मिला, इसलिए इसके लिए अपने HoO या हेल्पलाइन से पूछें।
संपर्क और आधिकारिक वेबसाइट
आधिकारिक पोर्टल healthscheme.wb.gov.in है। कई सरकारी पेजों पर पुराना पता wbhealthscheme.gov.in भी दिखता है, दोनों एक ही पोर्टल के हैं। शिकायत या सवाल के लिए:
- हेल्पलाइन: (033) 2254-4123 और (033) 2254-4034, सोमवार से शुक्रवार, सुबह 11 से शाम 5 बजे तक West Bengal Health Scheme
- ईमेल: [email protected] West Bengal Health Scheme
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या WBHS आम नागरिकों के लिए है?
नहीं। यह राज्य कर्मचारियों, पेंशनरों, AIS अधिकारियों और उनके पात्र आश्रितों की योजना है। आम नागरिकों के लिए अलग योजनाएँ हैं, जैसे Ayushman Bharat और Mukhyamantri Swasthya Bima Yojana।
क्या कैशलेस लिमिट ₹1 लाख है?
यह पुराना आँकड़ा है। पोर्टल का पेज अभी ₹2 लाख बताता है और 1 अक्टूबर 2026 से ₹5 लाख की सीमा लागू होने की अधिसूचना जारी हो चुकी है।
क्या माता-पिता को जोड़ सकते हैं?
हाँ, अगर उनकी सभी स्रोतों से मासिक आय ₹3,500 से ज़्यादा नहीं है। यह सीमा 2009 और 2010 के मेमो की है, इसलिए अपडेट की पुष्टि HoO से कर लें।
बेटा 25 साल का हो जाए तो?
वह सामान्य लाभार्थी नहीं रहता। 1 अक्टूबर 2026 से Non-Pecuniary Beneficiary का विकल्प है, जिसमें अनुमोदित रेट पर इलाज मिलता है पर कैशलेस या रीइम्बर्समेंट नहीं।
क्या स्कीम छोड़ी जा सकती है?
हाँ, पर अगर आपने या आपके किसी आश्रित ने कोई लाभ लिया है तो लाभ वाले महीने के अगले महीने से 5 साल तक बाहर नहीं निकल सकते।
रीइम्बर्समेंट क्लेम कितने दिन में करना होता है?
भर्ती वाले इलाज के लिए डिस्चार्ज से 3 महीने में और OPD के लिए हर विज़िट से 3 महीने में। देरी पर एक साल तक विभाग प्रमुख माफ़ कर सकते हैं।
गैर-सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज हुआ तो कितना मिलेगा?
अनुमोदित लागत का 60 प्रतिशत या असल भुगतान, जो कम हो। 80 से ज़्यादा बिस्तर वाले अस्पताल में 80 प्रतिशत।
बंगाल के बाहर इलाज के लिए अनुमति चाहिए?
हाँ। पर टाटा मेमोरियल, AIIMS दिल्ली और NIMHANS में सिर्फ संबंधित विभाग सचिव की मंज़ूरी काफ़ी है।
रिटायर होने पर क्या स्कीम अपने आप बंद हो जाती है?
नहीं। रिटायरमेंट में एक साल से कम बचा हो और आप स्कीम में हैं तो आप उसी तारीख से पेंशनर के रूप में जारी माने जाते हैं। PSA आपको पेंशनर के रूप में दर्ज करके नया सर्टिफिकेट जारी करता है।
क्या टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा OPD में मिलती है?
WBPay की 2022 की सूची के अनुसार सिर्फ इंसुलिन-निर्भर डायबिटीज़ शामिल है। सूची में बाद में संशोधन हुए हैं, इसलिए ताज़ा सूची पोर्टल पर देखें।
स्रोत
सरकारी:
- WBHS पोर्टल (होमपेज)
- योजना के बारे में
- उपलब्ध सुविधाएँ
- हेल्पलाइन पेज
- आकाशवाणी: बंगाल में Ayushman Bharat की शुरुआत
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण: PM-JAY