UPI Transaction Limit New Rules 2026 में असली बदलाव क्या है
रात के दस बजे मोहन के फोन पर एक मैसेज आया। उसकी किराना दुकान पर UPI से पेमेंट लेने पर अब चार्ज लगेगा, ऐसी खबर वायरल हो रही थी। पहला सवाल यही उठा कि क्या उसकी रोज की कमाई पर असर पड़ेगा। असल में यह डर लिमिट घटने का नहीं है। सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने का फैसला किया है, और यही असली बदलाव है।
रोज के पेमेंट पर कुछ नहीं बदलेगा
दोस्त या रिश्तेदार को पैसे भेजना पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा। चाहे 500 रुपये भेजें या 50,000, इस पर एक रुपया भी चार्ज नहीं लगेगा। यही बात दुकान पेमेंट पर भी लागू होती है, बशर्ते रकम 2,000 रुपये से कम हो। ऑटो वाले को किराया देना हो या चाय की दुकान पर बिल चुकाना हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। ग्राहक के तौर पर आपसे कोई एक्स्ट्रा पैसा नहीं लिया जाएगा। Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे पेमेंट ऐप्स को भी सरकार ने साफ चेतावनी दी है। ये ऐप्स यूजर्स से प्लेटफॉर्म फीस या किसी भी तरह का हिडन चार्ज नहीं वसूल सकते।
Transaction limit और MDR चार्ज में फर्क समझें
यहां एक बड़ी गलतफहमी है जिसे साफ कर लेना जरूरी है। ट्रांजेक्शन लिमिट का मतलब है आप एक दिन में कितना पैसा भेज सकते हैं। MDR का मतलब बिल्कुल अलग है, यह बताता है कि उस पेमेंट पर मर्चेंट को कितना चार्ज देना पड़ेगा। दोनों टर्म को मिलाकर मत देखिए। मौजूदा लिमिट की बात करें तो दोस्तों-रिश्तेदारों को भेजे जाने वाले P2P ट्रांसफर की डेली सीमा 1 लाख रुपये है। वेरिफाइड मर्चेंट कैटेगरी के लिए यह सीमा बढ़कर 10 लाख रुपये प्रतिदिन तक जाती है। यह बदलाव सितंबर 2025 में NPCI के सर्कुलर से लागू हुआ था। अक्टूबर 2026 का नया नियम इन दोनों लिमिट्स में कोई छेड़छाड़ नहीं कर रहा। सीधे शब्दों में, आपकी रोज की पेमेंट क्षमता जस की तस रहेगी। बस बड़े मर्चेंट पेमेंट्स पर एक नया चार्ज जुड़ रहा है।
MDR होता क्या है
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, वह कमीशन है जो एक व्यापारी अपने बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर को देता है। यह कमीशन डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले लिया जाता है। जनवरी 2020 से UPI पर इसे पूरी तरह जीरो रखा गया था ताकि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिले। अब वित्तीय सेवा विभाग और NPCI ने मिलकर एक नया MDR फ्रेमवर्क जारी किया है। यह फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू होगा।
₹2,000 से ऊपर पेमेंट पर चार्ज कैसे तय होगा
₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट्स पर चार्ज तीन हिस्सों में बंटा है। नीचे दी टेबल में पूरी स्लैब व्यवस्था देख सकते हैं।
| पेमेंट रकम | MDR दर | अधिकतम चार्ज |
|---|---|---|
| ₹2,000 तक | 0% | कोई चार्ज नहीं |
| ₹2,000 से ₹75,000 | 0.4% | रकम के हिसाब से |
| ₹75,000 और उससे ज्यादा | 0.4% (कैप्ड) | ₹300 |
मान लीजिए किसी दुकान पर आपने 5,000 रुपये का पेमेंट किया। इस पर मर्चेंट को 20 रुपये का MDR चुकाना होगा। यह पूरा चार्ज ग्राहक नहीं, दुकानदार भरेगा।
0.4% का यह चार्ज तीन जगह बंटता है। इसमें से 0.28% हिस्सा ग्राहक की बैंक यानी इशूइंग बैंक को जाता है। 0.08% हिस्सा UPI ऐप प्रोवाइडर के पास जाता है। बचा हुआ 0.04% एक्वायरिंग बैंक अपने पास रखता है। बिल पर यह चार्ज कभी नहीं दिखेगा, क्योंकि इसे ग्राहक से वसूलने की इजाजत नहीं है।
छोटे दुकानदार और वेंडर को राहत
छोटे कारोबारियों के लिए एक अलग सुरक्षा कवच बनाया गया है। जिन वेंडर्स को महीने में UPI QR कोड से 1 लाख रुपये तक पेमेंट मिलता है, वे P2PM कैटेगरी में आते हैं। इन दुकानदारों पर कोई MDR नहीं लगेगा, चाहे कोई एक पेमेंट 2,000 रुपये से ऊपर का ही क्यों न हो। रेहड़ी लगाने वाले, चाय बेचने वाले, किराना दुकानदार और ऑटो चलाने वाले ज्यादातर इसी दायरे में आएंगे। NPCI के आंकड़े भी इसी बात की तस्दीक करते हैं। देश में 96% से ज्यादा मर्चेंट ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये या उससे कम के होते हैं।
रेलवे, पेट्रोल, बीमा से कैपिटल मार्केट तक अलग रेट
कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। रेलवे टिकट, पेट्रोल पंप, बीमा और टेलीकॉम पर प्रतिशत की बजाय सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लगेगा। मान लीजिए आपने पेट्रोल पंप पर 2,500 रुपये का पेमेंट UPI से किया। इस पर मर्चेंट को सिर्फ 5 रुपये का चार्ज देना होगा, चाहे रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो। कैपिटल मार्केट से जुड़े पेमेंट्स के लिए भी अलग रेट तय किया गया है। म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े ट्रांजेक्शन पर 0.02% MDR लगेगा, जिसकी ऊपरी सीमा भी 300 रुपये है। स्कूल और यूनिवर्सिटी की फीस भरने पर भी एक अलग कैटेगरी लागू होती है।
यह पैसा जाता कहां है
MDR से जमा होने वाला पैसा सीधे बैंकों और ऐप प्रोवाइडर्स के बीच बंटता है, जैसा ऊपर बताया गया। इसके अलावा कुल MDR का 5% हिस्सा एक डेवलपमेंट फंड में जाएगा। यह फंड छोटे शहरों और गांवों में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर खर्च होगा। सिस्टम का पैमाना समझने के लिए एक आंकड़ा काफी है। अगस्त 2026 में अकेले UPI ने 2,451 करोड़ ट्रांजेक्शन प्रोसेस किए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। इतने बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए सर्वर और साइबर सिक्योरिटी पर लगातार भारी खर्च करना पड़ता है।
दुकानदार चार्ज मांगे तो क्या करें
यह चार्ज पूरी तरह मर्चेंट की लागत है, ग्राहक की नहीं। अगर कोई दुकानदार बिलिंग के समय यह कहकर एक्स्ट्रा पैसा मांगे कि आप UPI से पेमेंट कर रहे हैं, तो यह गलत है। ऐसी स्थिति में आप अपने बैंक या संबंधित अथॉरिटी से शिकायत कर सकते हैं।
आम आदमी के लिए UPI आज भी पूरी तरह फ्री है, और आगे भी रहेगा। असली बदलाव सिर्फ बड़े मर्चेंट पेमेंट्स तक सीमित है, जिसका बोझ ग्राहक की जेब पर कभी नहीं आएगा। छोटे दुकानदार, ऑटो वाले और रेहड़ी-पटरी वाले भी इस दायरे से बाहर रहेंगे। अगली बार जब आप किसी दुकान पर UPI से पेमेंट करें, तो बिल में कोई एक्स्ट्रा UPI चार्ज न जुड़ा हो, यह एक बार खुद जरूर देख लें।