PM SETU योजना: ₹60,000 करोड़ से बदलेंगे 1000 सरकारी ITI, अब देशभर के 200 क्लस्टर में लागू - पूरी जानकारी
देश के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) की तस्वीर बदलने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव लगाया है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की योजना PM‑SETU - Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs के तहत ₹60,000 करोड़ खर्च कर 1,000 सरकारी ITI को आधुनिक, उद्योग से जुड़े संस्थानों में बदला जाना है।
और अब यह योजना काग़ज़ से बाहर निकल चुकी है। 7 जुलाई 2026 को MSDE सचिव देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई चौथी राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee) की बैठक में PM‑SETU को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर सभी 200 चिह्नित ITI क्लस्टरों में लागू करने की मंजूरी दे दी गई। साथ ही ₹1,237.58 करोड़ की रणनीतिक निवेश योजनाएँ (SIP) भी स्वीकृत हुईं।
इस लेख में योजना का पूरा ढांचा, पैसा कहाँ से आएगा, ITI छात्रों को असल में क्या मिलेगा, और कंपनियाँ इसमें कैसे जुड़ सकती हैं — सब विस्तार से।
PM SETU आख़िर है क्या
PM‑SETU एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे कैबिनेट ने 7 मई 2025 को मंजूरी दी थी। पहले इसे "ITI Upgradation Scheme" कहा जाता था, बाद में नाम बदलकर PM SETU किया गया।
इसका Component I - जो इस लेख का विषय है - पूरी तरह ITI के अपग्रेडेशन पर केंद्रित है। इसका क्रियान्वयन प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर, एक विशेष प्रयोजन कंपनी (Special Purpose Vehicle – SPV) के ढांचे के ज़रिए करता है।
योजना की मूल सोच में एक बड़ा बदलाव छिपा है: ITI सरकार की संपत्ति रहेंगे, लेकिन उन्हें चलाने, कोर्स डिज़ाइन करने और प्रशिक्षण देने में उद्योग की भूमिका निर्णायक होगी। सरकारी बयान के अनुसार लक्ष्य यह है कि मौजूदा ITI "सरकारी स्वामित्व, उद्योग-प्रबंधित" आकांक्षी कौशल संस्थानों के रूप में स्थापित हों, और पाँच वर्षों में 20 लाख युवाओं को ऐसे कोर्स के ज़रिए प्रशिक्षित किया जाए जो उद्योग की असल ज़रूरत पूरी करें।
ताज़ा अपडेट: जुलाई 2026 में क्या मंज़ूर हुआ
जुलाई 2026 की NSC बैठक इस योजना का सबसे बड़ा पड़ाव रही। समिति ने क्रियान्वयन आसान बनाने, उद्योग की भागीदारी बढ़ाने और सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) की क्षमता मज़बूत करने से जुड़े उपायों पर भी सहमति जताई। बैठक में DGT के महानिदेशक दिलीप कुमार और संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर के अलावा राज्य सरकारों, बहुपक्षीय विकास साझेदारों और उद्योग के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।
पहले चरण में जो क्लस्टर मंज़ूर हुए, वे इस तरह हैं:
ओडिशा: सरकारी ITI बरबिल को हब बनाया गया है, जबकि आनंदपुर, कोइरा, करंजिया और बारकोट के सरकारी ITI स्पोक संस्थान होंगे। एंकर इंडस्ट्री पार्टनर जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड है, प्रस्तावित निवेश ₹240.21 करोड़।
गुजरात: सरकारी ITI सूरत हब है और हजीरा, बारडोली, सचिन तथा सूरत (महिला) के ITI स्पोक। एंकर पार्टनर आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया, प्रस्तावित निवेश ₹240.18 करोड़।
तेलंगाना (तीन क्लस्टर): सरकारी ITI ओल्ड सिटी हब है, जिसके स्पोक वारंगल, नलगोंडा (बॉयज़), विकाराबाद (गर्ल्स) और पंजागुट्टा हैं — एंकर पार्टनर अपोलो मेड-स्किल्स लिमिटेड, प्रस्तावित निवेश ₹241.01 करोड़। तीसरा क्लस्टर ITI संगारेड्डी (हब) के साथ हथनूरा, मेडक, दुब्बाका और येल्लारेड्डी के ITI का है, जिसमें न्यूलैंड फाउंडेशन एंकर पार्टनर है और प्रस्तावित निवेश ₹240.94 करोड़। तेलंगाना के तीसरे प्रस्ताव में श्री सिद्धार्थ इन्फ्राटेक एंड सर्विसेज़ (इंडिया) प्रा. लि. भी एंकर पार्टनर के रूप में शामिल है।
इससे पहले, दिसंबर 2025 में मंत्रालय ने उद्योग जगत को योजना में शामिल होने के लिए Expression of Interest (EOI) जारी किया था, और कर्नाटक, गुजरात, असम तथा चंडीगढ़ ने राज्य स्तर पर EOI निकाले थे।
हब-एंड-स्पोक मॉडल को आसान भाषा में समझिए
यह योजना का दिल है, और यही सबसे ज़्यादा उलझन पैदा करता है। सीधी भाषा में:
एक इलाके के पाँच ITI को एक क्लस्टर बना दिया जाता है। इनमें से एक ITI को हब बनाया जाता है — यानी वह सबसे बड़ा, सबसे उन्नत केंद्र, जहाँ महंगी मशीनें, एडवांस लैब, ट्रेनर-ट्रेनिंग की सुविधा और प्लेसमेंट सेल होगा। बाकी चार स्पोक ITI हैं, जो हब से जुड़े रहेंगे और उसकी सुविधाओं का लाभ उठाएँगे।
तर्क सरल है: हर ITI में ₹81 करोड़ की मशीन लगाना न संभव है, न ज़रूरी। एक जगह अत्याधुनिक सुविधा बनाकर उसे चार और संस्थानों से साझा कराना ज़्यादा व्यावहारिक है।
हर क्लस्टर को चलाने के लिए एक SPV बनती है, जिसमें एक विश्वसनीय Anchor Industry Partner (AIP) को लाया जाता है। यही कंपनी कोर्स डिज़ाइन, ट्रेनिंग डिलीवरी और रोज़गार के नतीजों की ज़िम्मेदारी उठाती है।
हब ITI बनाम स्पोक ITI - अंतर एक नज़र में
| बिंदु | हब ITI | स्पोक ITI |
|---|---|---|
| संख्या | 200 | 800 |
| अधिकतम परिव्यय (5 वर्ष) | ₹81 करोड़ | ₹40 करोड़ |
| औसतन नए कोर्स | 4 | 2 |
| औसतन अपग्रेड होने वाले कोर्स | 10 | 8 |
| ट्रेनर प्रशिक्षण (ToT) सुविधा | हाँ | नहीं (हब से लाभ) |
| प्रोडक्शन सेंटर, इनक्यूबेशन सेंटर, मेकर स्पेस | हाँ (शुल्क लेकर) | नहीं |
| एग्ज़िक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम | हाँ | नहीं |
कोर्स का ढांचा: अब तक ITI पास-आउट को National Trade Certificate (NTC) मिलता था। PM‑SETU के बाद विकल्प बढ़ेंगे — लंबी अवधि के डिप्लोमा, 3-6 महीने के शॉर्ट-टर्म कोर्स, और ग्रेजुएट व कामकाजी पेशेवरों के लिए एग्ज़िक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम। जहाँ उद्योग की मौजूदगी कम है, वहाँ सेवा क्षेत्र, मल्टी-स्किल और आजीविका से जुड़े कोर्स चलाने की छूट रहेगी।
डिजिटल हिस्सा: पूरे नेटवर्क की मैपिंग और रियल-टाइम डेटा के लिए एक Learning Outcome Management System (LOMS) बनाया जाएगा, जिसमें AR/VR और सिम्युलेशन आधारित लर्निंग तथा Skill India Digital Hub (SIDH) से जुड़ाव शामिल है।
पैसा कहाँ से, कितना और कैसे मिलेगा
पाँच साल के लिए कुल परिव्यय ₹60,000 करोड़ है, जिसका बँटवारा तीन पक्षों में है:
| पक्ष | राशि (₹ करोड़) | हिस्सा |
|---|---|---|
| केंद्र सरकार | 30,000 | ~50% |
| राज्य सरकारें | 20,000 | ~33% |
| उद्योग | 10,000 | ~17% |
| कुल | 60,000 | 100% |
यहाँ एक बात है जो ज़्यादातर रिपोर्टों में छूट जाती है: यह पूरा केंद्रीय हिस्सा सिर्फ़ भारत सरकार के खज़ाने से नहीं आ रहा। एशियाई विकास बैंक (ADB) और विश्व बैंक मिलकर केंद्रीय हिस्से का 50 प्रतिशत को-फाइनेंस कर रहे हैं — यानी इसका बड़ा हिस्सा बहुपक्षीय ऋण के रूप में आ रहा है।
घटकवार परिव्यय (1000 ITI):
| मद | राशि (₹ करोड़) |
|---|---|
| 200 हब ITI का अपग्रेडेशन | 20,220 |
| 800 स्पोक ITI का अपग्रेडेशन | 36,680 |
| उप-योग (Component I) | 56,900 |
| स्कीम प्रबंधन हेतु केंद्रीय सहायता | 1,600 |
प्रबंधन वाले ₹1,600 करोड़ में IT व डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर (LOMS सहित) के लिए ₹600 करोड़, PMU सहायता ₹400 करोड़, केंद्र-राज्य एजेंसियों की क्षमता निर्माण ₹200 करोड़, और तकनीकी सहायता, मीडिया-जागरूकता, मूल्यांकन-अध्ययन तथा कार्यालय व्यय के लिए ₹100-₹100 करोड़ रखे गए हैं।
बजट में असल आवंटन: योजना की घोषणा 2024-25 के बजट में ₹1,000 करोड़ के साथ हुई थी। 2025-26 में आवंटन ₹3,000 करोड़ रहा और 2026-27 में यह ₹6,140.50 करोड़ है। यह आंकड़ा बताता है कि खर्च अब धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ रहा है।
एस्क्रो खाता और KPI शर्त - इसका असली मतलब
यह हिस्सा तकनीकी लगता है, लेकिन योजना की सफलता-विफलता इसी पर टिकी है।
हर स्वीकृत क्लस्टर SPV एक एस्क्रो बैंक खाता चलाएगी। केंद्र, राज्य और उद्योग — तीनों का पैसा इसी खाते में जमा होगा, और फंड तभी उपलब्ध होगा जब तीनों पक्ष अपना-अपना हिस्सा जमा कर दें।
इसका व्यावहारिक अर्थ: अगर राज्य ने अपना हिस्सा नहीं डाला, या उद्योग भागीदार पीछे हट गया, तो केंद्र का पैसा भी बेकार पड़ा रहेगा। यह जवाबदेही का मज़बूत तंत्र है, पर देरी का जोखिम भी बढ़ाता है।
फंड रिलीज़ का क्रम:
- पहला साल: SIP मंजूर होते ही कुल परियोजना परिव्यय का 10% तक अग्रिम
- दूसरे से पाँचवें साल: शेष राशि सालाना किस्तों में, हर किस्त 50-50% की दो ट्रांच में
लेकिन अगली किस्त तीन शर्तों पर निर्भर है:
- पिछले फंड का कम से कम 75% उपयोग
- वार्षिक परिचालन योजना (AOP) की मंजूरी
- कम से कम 80% प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPI) की उपलब्धि
यानी सिर्फ़ इमारत खड़ी कर देने से पैसा नहीं मिलेगा - नतीजे दिखाने होंगे।
ITI छात्रों को असल में क्या मिलेगा
अधिकांश सरकारी दस्तावेज़ उद्योग और फंडिंग की भाषा में लिखे हैं। एक आम ITI छात्र के लिए बदलाव इस तरह होगा:
- नई मशीनें और लैब - अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, उपकरण और मशीनरी हर अपग्रेडेड ITI में
- कोर्स जो उद्योग ने खुद डिज़ाइन किए - पुराने ट्रेड का पाठ्यक्रम आधुनिक तकनीक के हिसाब से दोबारा लिखा जाएगा
- प्लेसमेंट सेवाएँ और उद्योग से सीधा जुड़ाव - क्लस्टर स्तर पर प्लेसमेंट सपोर्ट
- काउंसलिंग और रेमेडियल क्लास - बुनियादी पढ़ाई में कमज़ोर छात्रों के लिए अलग कक्षाएँ
- लाइफ स्किल ट्रेनिंग, अप्रेंटिसशिप और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग
- बेहतर ट्रेनर - हब ITI में ToT सुविधा से प्रशिक्षकों की गुणवत्ता सुधरेगी
एक ज़रूरी स्पष्टीकरण: यह छात्रों के लिए सीधे आवेदन करने वाली योजना नहीं है। इसमें न कोई छात्रवृत्ति फॉर्म है, न कोई ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन। यह संस्थानों के अपग्रेडेशन की योजना है - लाभ आपको तब मिलेगा जब आपका ITI किसी मंज़ूर क्लस्टर का हिस्सा बनेगा। सोशल मीडिया पर "PM SETU फॉर्म भरें" जैसे दावों से सावधान रहें।
एक और बात ध्यान देने योग्य: हब ITI को प्रोडक्शन सेंटर, इनक्यूबेशन सेंटर और मेकर स्पेस जैसी सेवाओं पर अपनी तय की गई फीस लेने की अनुमति है, ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे। यानी कुछ अतिरिक्त सेवाएँ निःशुल्क नहीं होंगी।
कंपनियों और उद्योग के लिए: Anchor Industry Partner कैसे बनें
पात्रता
सरकारी ITI के लिए:
- संस्थान सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान होना चाहिए
- चयन संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश करेगा
- आधार: उभरती कौशल ज़रूरत, स्थानीय उद्योग की मांग, और उद्योग भागीदारी की संभावना
एंकर इंडस्ट्री पार्टनर (AIP) के लिए:
- भारत में स्थापित संचालन वाली विश्वसनीय कंपनी या निर्माता
- उद्योग संघ, कंसोर्टियम, उद्योग-संचालित फाउंडेशन, या उद्योग द्वारा प्रवर्तित शैक्षणिक संस्थान भी पात्र
- गवर्नेंस, पाठ्यक्रम डिज़ाइन और प्रशिक्षण डिलीवरी में भाग लेने की क्षमता आवश्यक
- टर्नओवर, कर्मचारी संख्या और क्षेत्रीय अनुभव की न्यूनतम शर्तें राज्य/UT तय करेंगे
- छोटे या गैर-गंभीर संचालक पात्र नहीं
आवेदन प्रक्रिया (ऑफ़लाइन, 10 चरण)
- राज्य/UT अपग्रेडेशन के लिए सरकारी ITI चिह्नित करता है और पात्रता शर्तों सहित RFP तैयार करता है
- राज्य/UT पात्र AIP से प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए RFP जारी करता है
- आवेदक रणनीतिक निवेश योजना (SIP) के साथ प्रस्ताव जमा करता है — इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, कोर्स, मानव संसाधन, वित्तीय विवरण और क्रियान्वयन रणनीति शामिल
- प्रस्तावों का मूल्यांकन — प्री-क्वालिफिकेशन, SIP का तकनीकी आकलन, वित्तीय मूल्यांकन
- राज्य सरकार उपयुक्त प्रस्ताव चुनकर अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) को भेजती है
- मंजूरी के बाद हर क्लस्टर के लिए SPV बनती है; शेयरहोल्डर एग्रीमेंट (SHA) और लाइसेंस एग्रीमेंट (LA) निष्पादित होते हैं
- SPV के लिए एस्क्रो खाता खुलता है; केंद्र, राज्य और उद्योग का योगदान उसमें जमा होता है
- SPV मंज़ूर SIP के अनुरूप वार्षिक परिचालन योजना (AOP) तैयार करती है
- फंड चरणबद्ध तरीके से जारी - पहले अग्रिम, फिर उपयोग, प्रदर्शन और AOP मंजूरी के आधार पर किस्तें
- SPV क्रियान्वयन करती है - इन्फ्रास्ट्रक्चर, कोर्स डिलीवरी, प्रशिक्षण और छात्र सेवाएँ
ज़रूरी दस्तावेज़
Expression of Interest (EOI), RFP रेस्पॉन्स, निर्धारित प्रारूप में SIP, कंपनी पंजीकरण/निगमन दस्तावेज़, टर्नओवर दिखाने वाले वित्तीय विवरण, कर्मचारी संख्या का दस्तावेज़, डिबारमेंट घोषणा प्रमाणपत्र, राज्य सरकार से स्टाफिंग-फंडिंग-सुधार संबंधी प्रतिबद्धता पत्र, साझेदार उद्योगों के सहयोग पत्र (यदि लागू), हब-स्पोक ITI का बेसलाइन कैरेक्टरिस्टिक्स दस्तावेज़ (टेम्पलेट 1), पिछले तीन वित्तीय वर्षों के बजट आवंटन दस्तावेज़ (टेम्पलेट 2), पंचवर्षीय निवेश योजना बजट (टेम्पलेट 3), प्रदर्शन संकेतक दस्तावेज़ (टेम्पलेट 4), क्रियान्वयन गैंट चार्ट (टेम्पलेट 5), रोज़गार-अप्रेंटिसशिप-फंडिंग संबंधी MoU (यदि लागू), प्रबंधकीय क्षमता सहित HR प्लान, प्रस्तावित SPV CEO व प्रबंधन के क्रेडेंशियल, SHA, LA, अनुसूचित बैंक की बैंक गारंटी के रूप में परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, AOP, एसेट रजिस्टर, और चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित उपयोगिता प्रमाणपत्र।
पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए छूट
भौगोलिक हक़ीक़त को देखते हुए योजना में लचीलापन रखा गया है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में मिनी-हब की व्यवस्था है, जहाँ हब और स्पोक की परिभाषा में ढील दी जा सकती है - यानी एक हब के साथ चार स्पोक की शर्त अनिवार्य नहीं।
इसके अलावा, जहाँ अपग्रेडेशन की कुल लागत निर्धारित सीमा से ज़्यादा हो जाती है, वहाँ केंद्र का योगदान उपरोक्त सीमा के 50% तक ही सीमित रहेगा और केवल पूंजीगत व्यय तक - लेकिन पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों तथा बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिए इसमें अपवाद लागू हैं।
विश्लेषण: चुनौती कहाँ है
(यह खंड संपादकीय विश्लेषण है, सरकारी दावा नहीं।)
योजना की सबसे बड़ी ताक़त और सबसे बड़ी कमज़ोरी एक ही है - उद्योग पर निर्भरता।
पूरा मॉडल इस शर्त पर खड़ा है कि हर क्लस्टर के लिए एक गंभीर कंपनी आगे आए, ₹40-50 करोड़ का हिस्सा लगाए, और पाँच साल तक प्रशिक्षण-रोज़गार के नतीजों की ज़िम्मेदारी ले। यह आसान शर्त नहीं है। मई 2026 की एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक योजना को शुरुआती चरण में उद्योग भागीदार जुटाने में दिक्कत आई थी; कैबिनेट ने पहले वित्तीय वर्ष के लिए 25 हब-एंड-स्पोक क्लस्टर का पायलट रोलआउट मंज़ूर किया था।
इसी संदर्भ में जुलाई 2026 का फ़ैसला अहम है - समिति ने क्रियान्वयन सरल बनाने और PSU की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर सहमति जताई, जो संकेत देता है कि सरकार निजी क्षेत्र की सीमित प्रतिक्रिया को संतुलित करने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों को भी मैदान में उतार रही है।
दूसरी चुनौती एस्क्रो की तिहरी शर्त है। तीनों पक्षों का पैसा एक साथ चाहिए - इसका मतलब है कि राज्य की वित्तीय स्थिति भी योजना की रफ़्तार तय करेगी।
तीसरी बात: ₹60,000 करोड़ का बड़ा हिस्सा बहुपक्षीय ऋण से आ रहा है, यानी इस निवेश की वापसी रोज़गार के ठोस आंकड़ों में दिखनी ज़रूरी होगी।
निष्कर्ष
PM‑SETU Component I सिर्फ़ इमारत और मशीन बदलने की योजना नहीं है - यह ITI चलाने के तरीके में बुनियादी बदलाव है, जहाँ पाठ्यक्रम से लेकर प्लेसमेंट तक उद्योग की भूमिका केंद्रीय हो जाती है। 200 क्लस्टर में देशव्यापी रोलआउट की मंजूरी के बाद अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की है।
ITI छात्रों के लिए सलाह सीधी है: अपने संस्थान और राज्य के कौशल विकास विभाग से पूछते रहें कि आपका ITI किसी मंज़ूर क्लस्टर में शामिल है या नहीं। कंपनियों के लिए रास्ता राज्य स्तर के EOI और RFP से होकर जाता है।
अस्वीकरण: यह लेख myScheme पोर्टल, PIB और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी जानकारी पर आधारित है। योजना के प्रावधानों में समय-समय पर संशोधन संभव है - आवेदन या निर्णय से पहले आधिकारिक अधिसूचना अवश्य देखें।
FAQ
प्रश्न 1: PM SETU योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
PM‑SETU कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य 1,000 सरकारी ITI को उद्योग-अनुरूप, अत्याधुनिक कौशल संस्थानों में बदलना है ताकि रोज़गार-योग्य युवा तैयार हों। इसका Component I पूरी तरह ITI अपग्रेडेशन पर केंद्रित है।
प्रश्न 2: योजना का कुल बजट कितना है और बँटवारा कैसा है?
कुल परिव्यय ₹60,000 करोड़ है — केंद्र ₹30,000 करोड़, राज्य ₹20,000 करोड़ और उद्योग ₹10,000 करोड़। केंद्रीय हिस्से का 50% ADB और विश्व बैंक मिलकर को-फाइनेंस कर रहे हैं।
प्रश्न 3: हब-एंड-स्पोक मॉडल क्या है?
1,000 ITI में से 200 हब और 800 स्पोक होंगे। एक हब के साथ औसतन चार स्पोक ITI जुड़े रहेंगे। हब में सबसे उन्नत मशीनें, ToT सुविधा और अतिरिक्त सेवाएँ होंगी, जिनका लाभ स्पोक ITI को मिलेगा।
प्रश्न 4: एक ITI को अधिकतम कितना फंड मिल सकता है?
हब ITI के लिए पाँच वर्षों में अधिकतम ₹81 करोड़ और स्पोक ITI के लिए अधिकतम ₹40 करोड़। एक पूरे क्लस्टर (1 हब + 4 स्पोक) की लागत लगभग ₹241 करोड़ है।
प्रश्न 5: Anchor Industry Partner कौन बन सकता है?
भारत में स्थापित संचालन वाली विश्वसनीय कंपनी या निर्माता, उद्योग संघ, कंसोर्टियम, उद्योग-संचालित फाउंडेशन, या उद्योग द्वारा प्रवर्तित शैक्षणिक संस्थान। टर्नओवर, कर्मचारी संख्या और अनुभव की न्यूनतम शर्तें राज्य तय करती हैं।
प्रश्न 6: फंड कैसे जारी होता है?
पहले वर्ष में SIP मंजूरी पर 10% तक अग्रिम, फिर वर्ष 2-5 में सालाना किस्तें, हर किस्त 50-50% की दो ट्रांच में। शर्त — पिछले फंड का कम से कम 75% उपयोग, AOP की मंजूरी और कम से कम 80% KPI की उपलब्धि।
प्रश्न 7: एस्क्रो खाते का क्या मतलब है?
हर क्लस्टर SPV एक एस्क्रो खाता चलाती है जिसमें केंद्र, राज्य और उद्योग तीनों का पैसा जमा होता है। फंड तभी उपलब्ध होता है जब तीनों पक्ष अपना हिस्सा जमा कर दें।
प्रश्न 8: क्या ITI छात्र इस योजना में सीधे आवेदन कर सकते हैं?
नहीं। यह संस्थानों के अपग्रेडेशन की योजना है। छात्रों के लिए कोई अलग आवेदन फॉर्म उपलब्ध जानकारी में नहीं है — लाभ तब मिलता है जब उनका ITI किसी मंज़ूर क्लस्टर का हिस्सा बने।
प्रश्न 9: पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए क्या विशेष प्रावधान है?
इन क्षेत्रों के लिए मिनी-हब की व्यवस्था है, जहाँ हब और स्पोक की परिभाषा में ढील दी जा सकती है। साथ ही केंद्रीय योगदान की सीमा संबंधी नियमों में भी अपवाद लागू हैं।
प्रश्न 10: योजना की मौजूदा स्थिति क्या है?
7 जुलाई 2026 की चौथी NSC बैठक में योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर सभी 200 चिह्नित ITI क्लस्टरों में लागू करने की मंजूरी दी गई और ₹1,237.58 करोड़ की SIP स्वीकृत हुईं। पहले क्लस्टर ओडिशा, गुजरात और तेलंगाना में मंज़ूर हुए हैं।