NLM Scheme 2026: 50% सब्सिडी वाली इस योजना में 2,858 प्रोजेक्ट मंज़ूर, पैसा सिर्फ़ 1,168 को मिला - पूरी अप्लाई गाइड
बकरी पालन, मुर्गी पालन या सुअर पालन शुरू करने के लिए सरकार 50 फीसदी तक पैसा सब्सिडी के रूप में देती है। योजना का नाम है राष्ट्रीय पशुधन मिशन, यानी National Livestock Mission (NLM)। आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है और किसी सरकारी दफ़्तर के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं।
लेकिन ज़मीनी तस्वीर वो नहीं है जो ज़्यादातर वेबसाइटों पर दिखती है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अपने डैशबोर्ड के मुताबिक अब तक 2,858 प्रोजेक्ट मंज़ूर हुए हैं, जबकि सब्सिडी की रकम सिर्फ़ 1,168 प्रोजेक्ट तक पहुँची है। मतलब मंज़ूरी मिल जाना और खाते में पैसा आ जाना, दोनों अलग-अलग पड़ाव हैं। यह लेख दोनों को अलग करके समझाता है।
एक नज़र में NLM 2026
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना | राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) |
| विभाग | पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मत्स्यपालन-पशुपालन-डेयरी मंत्रालय |
| सब्सिडी | प्रोजेक्ट लागत का 50%, अधिकतम ₹50 लाख |
| असली रेंज | ₹3 लाख से ₹50 लाख, प्रोजेक्ट और यूनिट साइज़ के हिसाब से |
| किस्तें | दो बराबर किस्तें |
| पोर्टल | nlm.udyamimitra.in |
| आवेदन शुल्क | कोई नहीं |
| ज़मीन खरीद पर सब्सिडी | नहीं |
| पात्र | व्यक्ति, FPO, SHG, JLG, FCO, सेक्शन 8 कंपनी |
NLM है क्या और 2021 के बाद इसमें क्या बदला
NLM की शुरुआत 2014-15 में हुई थी। 2021-22 में इसे नए सिरे से ढाला गया, और तब से इसका मुख्य फोकस रोज़गार पैदा करने और उद्यमिता पर है। योजना का कुल परिव्यय ₹2,300 करोड़ है।
21 फरवरी 2024 को इसमें एक बड़ा बदलाव हुआ। ऊंट, घोड़ा और गधा की नस्ल सुधार गतिविधियाँ जोड़ी गईं, साथ ही बंजर भूमि, चरागाह और क्षरित वन भूमि पर चारा उत्पादन को भी शामिल किया गया। सरकार का तर्क यह रहा कि ये पशु असंगठित क्षेत्र में थे, उन्हें संगठित खेती के दायरे में लाना है।इसके बाद जनवरी 2025 में विभाग ने संशोधित व्यापक NLM गाइडलाइंस जारी कीं और मॉडल DPR भी अंतिम रूप दिए, जो NLM पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
यह छोटी सी बात काम की है। अगर आप DPR बनवाने जा रहे हैं, तो पहले सरकारी मॉडल DPR देख लें, वरना कंसल्टेंट को मोटी फीस देकर भी वही चीज़ मिलेगी।
जिस हिस्से में आम आदमी को पैसा मिलता है, उसे NLM-EDP कहते हैं, यानी उद्यमिता विकास कार्यक्रम।
कितनी सब्सिडी मिलती है - मैक्सिमम नहीं, रेंज देखिए
यहाँ ज़्यादातर वेबसाइटें गुमराह करती हैं। वो सिर्फ़ ऊपरी सीमा छापती हैं। असल में सब्सिडी आपके यूनिट के आकार पर तय होती है।
दिसंबर 2025 में लोकसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक अलग-अलग घटकों में सब्सिडी की सीमा ₹3 लाख से ₹50 लाख तक है। पोल्ट्री प्रोजेक्ट में ₹25 लाख तक, भेड़-बकरी में ₹10 लाख से ₹50 लाख, सुअर पालन में ₹15 लाख से ₹30 लाख, चारा प्रोजेक्ट और चारा बीज प्रसंस्करण इकाइयों में ₹50 लाख तक, और घोड़ा, ऊंट, गधा प्रजनन में ₹3 लाख से ₹50 लाख तक।
यूनिट साइज़ कैसे जुड़ता है, यह समझ लीजिए:
मुर्गी पालन: कम से कम 1,000 पैरेंट बर्ड की यूनिट, साथ में मदर यूनिट। 50% सब्सिडी, अधिकतम ₹25 लाख, दो बराबर किस्तों में।
भेड़-बकरी: 500 बकरी/भेड़ + 25 बकरा/मेढ़ा की यूनिट पर 50% सब्सिडी, ₹50 लाख तक। छोटी यूनिट भी मान्य हैं - 400+20, 300+15, 200+10 और 100+5 - और उसी अनुपात में सब्सिडी घटती है।
सुअर पालन: कम से कम 100 मादा और 25 नर की यूनिट पर ₹30 लाख तक। 50+5 की छोटी यूनिट पर ₹15 लाख।
चारा और फीड: हे, साइलेज, टोटल मिक्स्ड राशन (TMR), फोडर ब्लॉक और चारा बीज प्रसंस्करण, ग्रेडिंग व भंडारण इकाइयाँ - सभी 50% सब्सिडी के दायरे में।
तो अगर आप 100+5 की बकरी यूनिट लगा रहे हैं, ₹50 लाख की उम्मीद मत रखिए। सब्सिडी आपके प्रोजेक्ट की मंज़ूर लागत के आधे तक ही रहेगी।
तीन सब-मिशन, आसान भाषा में
1. नस्ल विकास। मुर्गी, भेड़, बकरी, सुअर के प्रजनन फार्म खोलने वालों को कैपिटल सब्सिडी। 2024 के बाद इसमें ऊंट, घोड़ा और गधा भी शामिल हैं।
2. चारा और फीड विकास। प्रमाणित चारा बीज की सप्लाई चेन मज़बूत करना और चारा प्रसंस्करण इकाइयों को सब्सिडी देना।
3. नवाचार और विस्तार। शोध, पशु बीमा, जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण।
आम आवेदक का वास्ता ज़्यादातर पहले और दूसरे से पड़ता है।
कौन आवेदन कर सकता है
व्यक्ति, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG), किसान सहकारी संगठन (FCO) और धारा 8 कंपनियाँ।
महिला आवेदकों के लिए एक आंकड़ा गौर करने लायक है। फरवरी 2026 तक NLM-EDP में 858 महिला-नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट मंज़ूर हुए हैं। इनमें दो JLG के हैं और एक महिला SHG का, जो मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में है। बाकी सब व्यक्तिगत महिला उद्यमियों के प्रोजेक्ट हैं। यानी समूह के मुकाबले व्यक्तिगत आवेदन कहीं ज़्यादा चल रहे हैं।
चार शर्तें जिन पर सबसे ज़्यादा आवेदन अटकते हैं
प्रशिक्षण या अनुभव। पशुपालन का प्रशिक्षण, अनुभव या प्रशिक्षित तकनीकी टीम ज़रूरी है। नए लोग राज्य पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय या केंद्रीय कुक्कुट विकास संगठन से ट्रेनिंग लेकर पात्र बन सकते हैं।
ज़मीन। अपनी या लीज़ की ज़मीन चाहिए। ध्यान रहे, ज़मीन खरीदने, लीज़ या किराए पर लेने, निजी इस्तेमाल की कार खरीदने या ऑफिस सजाने पर कोई सब्सिडी नहीं मिलती। लीज़ है तो एग्रीमेंट रजिस्टर्ड होना चाहिए।
बाकी 50% का इंतज़ाम। बची हुई लागत आवेदक को खुद जुटानी है, चाहे बैंक लोन से, NCDC जैसी वित्तीय संस्था के लोन से, या अपने पैसे से।
बैंक की मंज़ूरी, और यही सबसे बड़ी दीवार है। सरकार का साफ़ कहना है कि NLM-EDP में लोन मंज़ूर और वितरित करना बैंकों और कर्ज़दाता संस्थाओं का काम है, अपने आंतरिक नियमों के हिसाब से। बैंक हर आवेदन को आवेदक के CIBIL स्कोर, साख, कोलैटरल सिक्योरिटी, चुकौती क्षमता और दूसरी जाँचों के आधार पर परखता है, और यह उसका अधिकार है।
इस आख़िरी पॉइंट को हल्के में मत लीजिए। योजना की पात्रता पूरी करने का मतलब यह नहीं कि पैसा मिल ही जाएगा। अगर आपका क्रेडिट स्कोर खराब है या पुराना कोई लोन डिफ़ॉल्ट है, फाइल बैंक स्तर पर ही रुक सकती है। आवेदन से पहले अपना CIBIL स्कोर एक बार देख लेना समझदारी है।
ज़रूरी दस्तावेज़
कोई भी कागज़ फिजिकली जमा नहीं करना होता, सब पोर्टल पर अपलोड होता है।
व्यक्तिगत आवेदक के लिए: आधार, पैन, विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), ज़मीन के कागज़ और ताज़ा भू-कर रसीद, पता प्रमाण, आवेदक की फोटो और प्रोजेक्ट साइट की GIS लोकेशन वाली फोटो, बैंक मैंडेट फॉर्म के साथ रद्द चेक, छह महीने का बैंक स्टेटमेंट, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र या अनुभव पत्र, और SC/ST श्रेणी में आवेदन हो तो जाति प्रमाणपत्र।
संस्थाओं के लिए अतिरिक्त: पार्टनरशिप डीड या इनकॉर्पोरेशन सर्टिफिकेट, GST रजिस्ट्रेशन, जुड़े किसानों की सूची (नाम, आधार, मोबाइल, पता), पिछले तीन साल के ऑडिटेड वित्तीय विवरण और इनकम टैक्स रिटर्न।
एक व्यावहारिक सलाह: DPR ही वो दस्तावेज़ है जिस पर राज्य समिति और बैंक दोनों सबसे ज़्यादा समय लगाते हैं। उसमें लागत, वित्त के स्रोत, आवर्ती खर्च और शुद्ध आय का हिसाब साफ़ होना चाहिए। पोर्टल पर मौजूद मॉडल DPR को आधार बनाइए।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
- DPR, KYC, ज़मीन के कागज़ और बैंक डिटेल पहले से तैयार रखें।
- nlm.udyamimitra.in खोलकर "Apply Here" पर जाएँ।
- लॉगिन टाइप में "Entrepreneur" चुनें।
- नाम, स्टेटस, राज्य, जिला, मोबाइल और ईमेल के साथ रजिस्टर करें। पोर्टल पर आवेदन के लिए मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। OTP से सत्यापन होगा।
- लॉगिन करके अपना घटक चुनें — पोल्ट्री, बकरी, भेड़, सुअर, चारा या अन्य।
- लोन एप्लीकेशन फॉर्म (LAF) भरें।
- सारे दस्तावेज़ अपलोड करके सबमिट करें।
- स्थिति जानने के लिए पोर्टल के ऊपरी दाएँ कोने में मौजूद "Track Status" टैब इस्तेमाल करें।
आवेदन के बाद क्या होता है, और पैसा कब आता है
फाइल पहले राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (SIA) के पास जाती है, फिर आपके चुने हुए बैंक के पास लोन मूल्यांकन के लिए। बैंक मंज़ूरी दे तो राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (SLEC) प्रोजेक्ट की समीक्षा करती है और अंत में DAHD सब्सिडी मंज़ूर करता है।
विभाग खुद मानता है कि सब्सिडी वितरण की प्रक्रिया राज्य सरकार, बैंक और केंद्र — तीनों स्तरों पर जाँच से गुज़रती है। पहली और दूसरी किस्त तभी मिलती है जब लाभार्थी सारे नियम पूरे करके ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करे।
इसलिए कोई तय समय-सीमा बताने वाले दावों पर भरोसा मत कीजिए। दूसरी किस्त प्रोजेक्ट पूरा होने और सत्यापन के बाद ही आती है।
आंकड़े क्या कहते हैं (Talkaaj विश्लेषण)
DAHD के NLM-EDP डैशबोर्ड (15 सितंबर 2026 को अपडेटेड) के मुताबिक अब तक 2,858 प्रोजेक्ट मंज़ूर हुए हैं। कुल प्रोजेक्ट लागत ₹2,097.91 करोड़, लोन राशि ₹789.92 करोड़ और मंज़ूर सब्सिडी ₹967.46 करोड़ है। सेक्टर के हिसाब से भेड़-बकरी में 2,318, सुअर पालन में 271, ग्रामीण कुक्कुट में 172 और चारा-फीड में 97 प्रोजेक्ट मंज़ूर हैं। आवेदकों में 2,215 पुरुष और 643 महिलाएँ हैं। सब्सिडी की बात करें तो 1,168 प्रोजेक्ट को कुल ₹235.30 करोड़ जारी हो चुके हैं।
इन आंकड़ों से तीन बातें निकलती हैं।
पहली, मंज़ूर सब्सिडी ₹967.46 करोड़ है और जारी हुई ₹235.30 करोड़। यह फ़र्क बताता है कि ज़्यादातर प्रोजेक्ट अभी पहली या दूसरी किस्त के बीच कहीं अटके हैं। योजना में पैसा मिलता है, पर एक बार में नहीं और जल्दी नहीं।
दूसरी, हर पाँच में से चार मंज़ूर प्रोजेक्ट भेड़-बकरी के हैं। चारा और फीड सेक्टर में सिर्फ़ 97 प्रोजेक्ट हैं, जबकि वहाँ सब्सिडी सीमा भी ₹50 लाख है। जो लोग कम भीड़ वाली श्रेणी ढूँढ रहे हैं, उनके लिए यह सोचने की बात है।
तीसरी, यह आंकड़ा भी देख लीजिए — दिसंबर 2025 के संसदीय जवाब में NLM-EDP के तहत पिछले पाँच साल में ₹559.53 करोड़ आवंटित बताए गए थे, और उसमें दी गई श्रेणीवार तालिका में 3,843 प्रोजेक्ट, ₹2,672.45 करोड़ की लागत, ₹1,233.69 करोड़ मंज़ूर सब्सिडी और ₹473.4 करोड़ जारी सब्सिडी दर्ज है। उसी जवाब में कहा गया कि NLM-EDP से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 18,475 लोगों को रोज़गार मिलने का अनुमान है।
संपादकीय नोट: संसदीय जवाब और पोर्टल डैशबोर्ड के आंकड़े अलग हैं, क्योंकि दोनों की गिनती का आधार और तारीख़ अलग है (एक में आवेदन की अलग स्टेज गिनी गई है)। इन्हें जोड़कर या आपस में घटाकर मत पढ़िए। दोनों को अलग-अलग स्रोत मानकर देखना ही सही है।
पशु बीमा में 2026 का बदलाव
यह हिस्सा ज़्यादातर गाइड्स में दब जाता है, जबकि छोटे पशुपालक के लिए सीधे काम का है।
विभाग ने प्रति परिवार बीमा कवर 5 कैटल यूनिट से बढ़ाकर 10 कैटल यूनिट कर दिया है, जहाँ 1 कैटल यूनिट 10 छोटे पशुओं के बराबर मानी जाती है। सुअर और खरगोश के लिए यह सीमा 5 यूनिट है। प्रीमियम में किसान का हिस्सा पहले 20 से 50 प्रतिशत के बीच होता था, जिसे सरल करके एकसमान 15 प्रतिशत कर दिया गया है। बाकी 85 प्रतिशत केंद्र और राज्य मिलकर उठाते हैं — ज़्यादातर राज्यों में 60:40 के अनुपात में और हिमालयी व पूर्वोत्तर राज्यों में 90:10 के अनुपात में। पिछले पाँच साल में इस मद में ₹161.07 करोड़ जारी हुए हैं और 60.80 लाख पशु बीमित किए गए हैं।
अगर आप NLM के तहत यूनिट लगा रहे हैं, तो बीमा को अलग से देखिए। पशु की मौत एक सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट को भी डुबा सकती है।
क्या योजना 2026 में चालू है
यह सवाल जायज़ है, क्योंकि NLM का संशोधित स्वरूप 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए अधिसूचित हुआ था।
जो पुष्ट है, वो यह: 11 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने NLM-EDP को चालू योजना के रूप में बताया और कहा कि पूरी प्रक्रिया nlm.udyamimitra.in के ज़रिए डिजिटल है। विभाग का NLM-EDP डैशबोर्ड भी 15 सितंबर 2026 तक अपडेट है। Press Information BureauDepartment of Animal Husbandry and Dairying
2025-26 के बाद योजना को औपचारिक रूप से कितनी अवधि के लिए बढ़ाया गया है, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। आवेदन करने से पहले पोर्टल पर ताज़ा अधिसूचना ज़रूर देख लें।
आवेदन की कोई अंतिम तिथि किसी सरकारी दस्तावेज़ में नहीं मिली। पोर्टल पर आवेदन साल भर खुले रहते हैं। जो वेबसाइटें "लास्ट डेट" बताकर जल्दबाज़ी कराती हैं, उनसे सावधान रहिए।
फर्जीवाड़े से कैसे बचें
आवेदन के लिए कोई शुल्क नहीं है और पोर्टल पर कोई भी इच्छुक आवेदक खुद आवेदन कर सकता है। सोशल मीडिया पर "गारंटीड अप्रूवल" या "फाइल पास कराने" का दावा करने वाले एजेंट का कोई आधिकारिक दर्जा नहीं है। सब्सिडी की मंज़ूरी बैंक, राज्य समिति और DAHD की जाँच से तय होती है, किसी बिचौलिए से नहीं।
DPR बनवाने के लिए किसी पेशेवर की मदद लेना अलग बात है और वैध है। पर उसे "अप्रूवल दिलवाने" की फीस मत दीजिए।
आधिकारिक संपर्क
- पोर्टल: nlm.udyamimitra.in — आवेदन, ट्रैकिंग और तकनीकी सहायता
- विभाग: dahd.gov.in — गाइडलाइंस और अधिसूचनाएँ
- ईमेल सहायता: [email protected] — पोर्टल और अकाउंट संबंधी समस्या पर
- पता: पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कमरा नंबर 245, कृषि भवन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड, नई दिल्ली – 110001
- राज्य-विशेष सवालों के लिए अपनी राज्य कार्यान्वयन एजेंसी यानी राज्य पशुपालन विभाग से संपर्क करें।
FAQ
1. NLM योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?
प्रोजेक्ट लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹50 लाख। असल रकम प्रोजेक्ट और यूनिट साइज़ पर निर्भर करती है और ₹3 लाख से ₹50 लाख के बीच रहती है।
2. बकरी पालन पर अधिकतम कितनी सब्सिडी है?
₹50 लाख तक, 500 बकरी और 25 बकरे की यूनिट पर। छोटी यूनिट (400+20, 300+15, 200+10, 100+5) पर सब्सिडी उसी अनुपात में घटती है और सरकारी आंकड़ों में यह रेंज ₹10 लाख से शुरू होती है।
3. मुर्गी पालन पर कितनी सब्सिडी है?
कम से कम 1,000 पैरेंट बर्ड की यूनिट पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, अधिकतम ₹25 लाख।
4. सुअर पालन में कितना मिलता है?
100 मादा और 25 नर की यूनिट पर ₹30 लाख तक। 50+5 की यूनिट पर ₹15 लाख तक।
5. आवेदन कहाँ करें?
सिर्फ़ nlm.udyamimitra.in पर। कोई और वेबसाइट आधिकारिक नहीं है।
6. क्या आवेदन का कोई शुल्क है?
नहीं। आवेदन निःशुल्क है और आवेदक खुद कर सकता है।
7. क्या ज़मीन खरीदने पर सब्सिडी मिलती है?
नहीं। ज़मीन की खरीद, लीज़ या किराया, निजी कार और ऑफिस सेटअप सब्सिडी के दायरे से बाहर हैं।
8. सब्सिडी कैसे मिलती है?
दो बराबर किस्तों में, राज्य सरकार, बैंक और केंद्र स्तर पर जाँच पूरी होने के बाद। दूसरी किस्त प्रोजेक्ट पूरा होने और सत्यापन के बाद जारी होती है।
9. बिना अनुभव के आवेदन कर सकते हैं?
हाँ, अगर आप राज्य पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, केंद्रीय कुक्कुट विकास संगठन या मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रशिक्षण ले लें।
10. आवेदन रिजेक्ट क्यों होता है?
सबसे आम वजह बैंक स्तर पर होती है। लोन मंज़ूर करना बैंक का अधिकार है और वह CIBIL स्कोर, साख, कोलैटरल और चुकौती क्षमता देखता है। इसके अलावा अधूरा DPR, बिना रजिस्टर्ड लीज़ एग्रीमेंट और अधूरे दस्तावेज़ भी बड़ी वजहें हैं।
11. क्या योजना की कोई अंतिम तिथि है?
उपलब्ध जानकारी में कोई अंतिम तिथि निर्धारित नहीं है। आवेदन पोर्टल पर साल भर चलते हैं।
12. पशु बीमा में किसान को कितना प्रीमियम देना है?
एकसमान 15 प्रतिशत। बाकी 85 प्रतिशत केंद्र और राज्य वहन करते हैं, ज़्यादातर राज्यों में 60:40 और हिमालयी तथा पूर्वोत्तर राज्यों में 90:10 के अनुपात में।
13. क्या NLM 2026 में चालू है?
फरवरी 2026 के संसदीय जवाब और सितंबर 2026 तक अपडेटेड सरकारी डैशबोर्ड के आधार पर योजना सक्रिय है। 2025-26 के बाद की औपचारिक विस्तार अवधि की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।